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जवाबदेही का समय

माना आपदा का आना सरकार के हाथों में नहीं है, लेकिन आपदा का प्रभाव कम से कम हो और समय रहते उसका न्यूनीकरण हो, यह सुनिशिचत करना जरूर सरकार के हाथों में है। जब सरकारें अपनी उपलब्धियों का श्रेय लेने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती हैं, यहां तक की पूर्ववर्ती सरकारों की उपलब्धियों का […]

Coronavirus, COVID-19कोरोना के बढ़ते केसों के बीच देशभर के अस्पतालों में पड़ गई है बेड्स की कमी। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

माना आपदा का आना सरकार के हाथों में नहीं है, लेकिन आपदा का प्रभाव कम से कम हो और समय रहते उसका न्यूनीकरण हो, यह सुनिशिचत करना जरूर सरकार के हाथों में है। जब सरकारें अपनी उपलब्धियों का श्रेय लेने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती हैं, यहां तक की पूर्ववर्ती सरकारों की उपलब्धियों का श्रेय लेने में भी पीछे नहीं रहती हैं, तो उन्हें अपनी उन नाकामियों को भी स्वीकार करना चाहिए, जिसके कारण लाखों आमजन काल के गाल में समाने को मजबूर हुए। ताकि जनता हमारी सरकारों की आमजन के कल्याण के लिए इच्छाशक्ति से भलीभांति अवगत हो सकें, क्योंकि सरकारें जनता के कल्याण के लिए होती हैं, न कि जनता सरकारों की नाकामियों की सजा भुगतने के लिए।

कोरोना महामारी ने हमें हमारे देश की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तथा हमारी सरकारों की जनता के कल्याण के प्रति उनकी इच्छाशक्ति से भलीभांति परिचित करा दिया है। अब समय आ गया है जब सरकारों की जनता के कल्याण के प्रति जवाबदेही तय की जाए, क्योंकि जब तक सरकारों का नेतृत्व करने वाले नेताओं का मोह केवल सत्ता के लाभ तक ही सीमित रहेगा, तब तक ऐसी आपदाओं में इसी प्रकार आमजन काल के गाल में समाने को मजबूर होते रहेंगे।
’प्रवचन सेन, झांसी, उप्र

मदद के मंच
सोशल मीडिया के इस्तेमाल से भले ही फर्जी समाचारों को बढ़ावा मिलता हो, लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया नई मिसाल पेश कर रहा है। हर तरफ आॅक्सीजन, जरूरी दवाइयों की कमी हो रही है, पर सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ लोग एक दूसरे की मदद करने के लिए सामने आ रहे हैं, जो बहुत ही सराहनीय कार्य है। यहां लोग मदद की गुहार भी लगा रहे हैं तो मदद देने के लिए संपर्क भी कर रहे हैं। शायद सोशल मीडिया का इससे अच्छा प्रयोग और कुछ नहीं हो सकता। गैरसरकारी संगठन हो या एकल व्यक्ति, जरूरतमंद लोगों को दवाई से लेकर खाने-पीने की व्यवस्था कर रहे हैं।

सभी लोगों को ऐसी जानकारी साझा करनी चाहिए, ताकि समय पर जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंच सके। हमें मिल कर ऐसे लोगों के साथ हाथ मिलाना और बढ़ाना चाहिए। जिस वक्त हर तरफ खौफ का नजारा है उस वक्त सोशल मीडिया लोगों को तसल्ली दे रहा है। कई लोगों की टूटती सांसों को सोशल मीडिया के जरिए नया जीवन मिला है। हमें इस तरह के संदेशों को सबके साथ साझा करना चाहिए और मदद करने वाले लोगों को बढ़ावा देना चाहिए।
’आशीष, जामिया मिल्लिया, नई दिल्ली

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