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सांस्कृतिक टकराव नहीं

इस युद्ध को क्लैश आफ सिविलाइजेशन की संज्ञा देना तार्किक नहीं होगा, क्योंकि रूस ने यूक्रेन में पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है। इस तरह यह संस्कृति और धर्म के आधार पर लड़ी जाने वाली लड़ाई कतई नहीं है।

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रूसी हमले में यूक्रेन का शहर तबाह (फोटो- पीटीआई)

पिछले कुछ समय से यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संघर्ष को कुछ विचारकों ने सैमुअल हटिंगटन द्वारा प्रतिपादित क्लैश आफ सिविलाइजेशन की दृष्टि से देखने का प्रयास किया है। हटिंगटन का मानना है कि शीत युद्ध के बाद की दुनिया में अलग-अलग सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान वाली सभ्यताओं के बीच संघर्ष होगा। उन्होंने सीनिक सभ्यता (चीन) और इस्लामिक सभ्यता के गठजोड़ की बात कही और इस्लामी सभ्यता को विश्व शांति के लिए खतरा बताया था।

साथ ही हिंदू सभ्यता और आर्थोडाक्स क्रिश्चियन सभ्यता (रूस) को स्विंग सभ्यता की संज्ञा दी। इसी तर्ज पर रूस-यूक्रेन युद्ध को देखने का प्रयास किया जा रहा है, हालांकि हटिंगटन ने जिस संदर्भ में भारत के साथ रूस को स्विंग सभ्यता के रूप में प्रस्तुत किया था, वह बदल चुका है।

अमेरिकी नीतियों की आलोचना इसलिए भी होती है, क्योंकि पुतिन ने नार्थ स्ट्रीम पाइपलाइन के माध्यम से यह संकेत देने का प्रयास किया कि वह पश्चिमी देशों के साथ बेहतर संबंध करना चाहते हैं, वहीं भारत अपने स्विंग सिविलाइजेशन की छवि को बनाए रखने में सफल रहा है। इसका उदाहरण तब देखने को मिला, जब यूएसए के साथ अच्छे संबंध होने के बावजूद उसके द्वारा यूएनएससी में रूस के खिलाफ वोट करने से इंकार कर दिया।

बावजूद इसके, इस युद्ध को क्लैश आफ सिविलाइजेशन की संज्ञा देना तार्किक नहीं होगा, क्योंकि रूस ने यूक्रेन में पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है। इस तरह यह संस्कृति और धर्म के आधार पर लड़ी जाने वाली लड़ाई कतई नहीं है।

रवि राज, गया

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