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लापरवाही किसकी

यह समझना मुश्किल है कि ऐसा क्यों होता है कि कोरोना से गरीबों, मजदूरों, बच्चों, किसानों और आम जनता पर खतरा है, लेकिन नेताओं को नहीं। ऐसा लगता है कि कोरोना के सहारे देश और समाज को अभी बहुत सारे तकलीफदेह और अजीब रंग देखने हैं।

यूपी के कानपुर से सटे उन्नाव में गंगा नदी के तट किनारे रेती वाले इलाके में परिजन को दफनाने के लिए इंतजार करते लोग। (फाइल फोटोः पीटीआई)

ऐसी बातें लगातार कही जा रही हैं कि कोरोना चीन के द्वारा फैलाई गई बीमारी है जो दुनिया के हर देश में जाकर बसने की कोशिश कर चुका है। लेकिन कुछ देशों में इसका राज नहीं चला और कई देशों ने इसके खिलाफ फतेह भी हासिल की है। इस बीमारी से संक्रमित लोगों की संख्या पहली लहर में ज्यादा नहीं थी, लेकिन इसका कहर इस लहर में जम कर बरस रहा है। अब एक साल ऊपर का हो गया है।

चीन ने अपने देश में कोरोना से कारगर तरीके से लड़ाई की। बाद में भारत में यह अब अपना कहर बरपाने लगा है। तीसरी लहर के आते-आते स्थिति शायद और बिगड़ जाए। विचित्र यह है कि इस महामारी से आमतौर पर नेताओं को बहुत ज्यादा कुछ नहीं बिगड़ता। वे चुनावों में रैलियां और जुलूस करते रहते हैं। यह समझना मुश्किल है कि ऐसा क्यों होता है कि कोरोना से गरीबों, मजदूरों, बच्चों, किसानों और आम जनता पर खतरा है, लेकिन नेताओं को नहीं। ऐसा लगता है कि कोरोना के सहारे देश और समाज को अभी बहुत सारे तकलीफदेह और अजीब रंग देखने हैं।

यह समझना मुश्किल है कि दूसरे देशों को ऑक्सीजन बांटने से पहले सरकार को अपने देश की हालत को देखना जरूरी नहीं लगता। सरकारी लापरवाही के चलते ही गरीब एक शहर से दूसरे शहर को पलायन करने लगे। इसके कारण लोगों की हालत इतनी बुरी हो गई है कि हर घर में डर झलकता है। लोग ऑक्सीजन के लिए इस तरह तड़पेंगे, ऐसा किसी ने कभी नहीं सोचा था। सवाल यह उठता है कि सरकार पहले सावधान क्यों नहीं हुई!

रिशु झा, फरीदाबाद, हरियाणा

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