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रिश्ते का सफर

भारत के साथ रूस के राजनीतिक संबंध शुरू से ठीक रहे हैं। रूस के विदेश मंत्री की भारत की यात्रा पर चीन की भौहें टेढ़ी हो गई हैं।

India -Russiaसांकेतिक फोटो।

भारत के साथ रूस के राजनीतिक संबंध शुरू से ठीक रहे हैं। रूस के विदेश मंत्री की भारत की यात्रा पर चीन की भौहें टेढ़ी हो गई हैं। चीन नहीं चाहता है कि रूस और भारत की मैत्री प्रगाढ़ बनी रहे। शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद क्वाड सम्मेलन में अमेरिका ने रूस के प्रति तीखा रुख अपनाया। चीन का नाम लिए बिना अमेरिका ने बहुत कुछ कह दिया। क्वाड सम्मेलन के बाद रूस के तेवर थोड़े ढीले पड़े हैं। अब वहां के विदेश मंत्री के भारत की यात्रा से रिश्ते मजबूत होंगे।

यों भी भारत का रूस के साथ सामरिक संबंध पुराना और गहरा है। 2020 में भारत ने रूस से समझौता किया था। एक सवाल यह उठाया जा रहा है कि रूस के विदेश मंत्री लवारोव किस कारण भारत की यात्रा पर हैं। गौरतलब है कि चीन का भारत के साथ तनाव फिलहाल बरकरार है। इस परिप्रेक्ष्य में रूस और चीन ने मिल कर जो नया क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक नया संगठन बनाने की घोषणा की है, उससे रूस के विदेश मंत्री की भारत यात्रा को जोड़ कर देखा जा सकता है। हालांकि क्वाड बैठक में अमेरिका का हौसला बढ़ा है। लेकिन यह भी सच है कि रूस ने भारत का हमेशा साथ दिया है।

पिछले कुछ समय से भारत की बढ़ती ताकत से यूरोपीय देश खुश हैं। वर्तमान बदलते विश्व में भारत शांतिदूत बन कर दो ध्रुवों के बीच शांतिवार्ता का हिस्सा बन सकता है। रूस के विदेश मंत्री की ताजा भारत यात्रा से इसकी ठोस जमीन बन सकती है। मगर यह भी तथ्य है कि भारत की तरह पाकिस्तान भी रूस से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश में लगा हुआ है। दरअसल, अमेरिका जानता है कि रूस और भारत एक हुए तो हमारी ताकत कम हो जाएगी। इसलिए वह कूटनीतिक चाल चलने से नहीं चूकेगा।
’कांतिलाल मांडोत, सूरत, गुजरात

सेहत की सुध

विश्व स्वास्थ्य दिवस आकर गुजर गया, जो जीवन में स्वास्थ्य के महत्त्व को याद करने के लिए मनाया जाता है। उच्च लक्ष्यों की प्राप्ति, खुशहाल जीवन और देश की अर्थव्यवस्था में किसी व्यक्ति के योगदान के लिए पूर्वपेक्षित है। स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च के मामले में भारत विश्व के सबसे कम खर्च करने वालों वाले देशों में से एक है। हमारे देश में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल 1.26 फीसद ही स्वास्थ्य पर खर्च किया जाता है, जबकि भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 ने इसे 2.5 फीसद करने का लक्ष्य दिया है।

हर नागरिक को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाना सरकार का कर्तव्य है। साथ ही भारत को अब सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की ओर बढ़ना चाहिए। गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए आयुष्मान भारत योजना को इसकी पहली सीढ़ी माना जा सकता है। हाल ही में राजस्थान सरकार ने अपने 2021-22 के बजट में स्वास्थ्य की दिशा में काबिल-ए-तारीफ कदम बढ़ाते हुए राज्य के सभी परिवारों को पांच लाख तक की बीमा योजना प्रस्तावित की है। अगर ऐसा देश के हर नागरिक के लिए सुनिश्चित किया जा सके तो कई परिवार आर्थिक तंगी से बच जाएंगे।
’डिंपी भाटिया, नई दिल्ली

मतदान का दायित्व

चुनाव यानी गणतंत्र में एक जनप्रतिनिधि निर्वाचित करने की संविधानिक प्रक्रिया। देश की आम जनता मतदान करती है अपनी समस्याओं को चुने गए जनप्रतिनिधि के द्वारा सरकार को दृष्टि में डालने में सहायता करने के लिए, ताकि किसी एक विशेष निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले दिनों में सरकार से मदद मिल सके और इस इलाके के लोग देश के विकास में एक कदम आगे बढ़ा सकें।

लेकिन कई लोग आजकल वोट देने से इनकार करते हुए या उदासीन दिख रहे हैं जो एक बहुत बुरी बात है। मतदान करने से देश की विचार प्रक्रिया को एक स्वस्थ और उन्नति की यात्रा में आगे ले जाने जैसा ही होता है। इसीलिए हम सभी लोगों को भारतवर्ष का नागरिक होने के नाते दिल खोल कर अपने विचार को आगे रख कर मतदान करना चाहिए, क्योंकि यह हमारा एक संवैधानिक अधिकार हैं और इसका पालन करना हमारा दायित्व है।
’चंदन कुमार नाथ, गुवाहाटी, असम

दोहरे पैमाने

कुछ माह के अंतराल के बाद राजनीति और मीडिया के गलियारे से कोरोना का जिन्न फिर निकल आया है। बिहार और झारखंड में स्कूल-कॉलेजों को एक बार फिर से बंद कर दिया गया है तो दूसरी तरफ जनता में फिर से पूर्णबंदी का खौफ दिख रहा है। एक तरफ देश के पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लाखों की भीड़ जुट रही है, लेकिन उन राज्यों में कोरोना की चर्चा नहीं हो रही है। राज्य सरकारें अपनी ओर से कोरोना दिशानिदेर्शों को जारी कर रही है। इसके तहत जारी आदेश शायद सिर्फ आम जनता पर लागू है।

ये आदेश शायद अफसरों की मदद से नेताओं के लिए जुटाई गई भीड़ पर और नेताओं पर लागू नहीं होती है। स्कूल-कॉलेजों के खुला रहने से कोरोना फैलने की बात कही जा रही है, लेकिन नेताओं की राजनीतिक रैलियों में आ रही लाखों की भीड़ से कोरोना नहीं फैलता है। यह किस तरह की बातें चल रही हैं! दरअसल, कमी जनता में भी है जो महज भीड़ बनने से इनकार नहीं कर रही है।

बिना खुद की बुद्धि विवेक लगाए नेताओं और अफसरों के गुलाम की तरह व्यवहार कर रही है। जब इन राज्यों में चुनाव खत्म हो जाएंगे तो इसी जनता के खिलाफ सड़क पर निकलने और भीड़ लगाने पर पुलिस कार्रवाई करेगी। इस तरह के विरोधाभासों और भ्रमों में पलते समाज का सफर कहां जाकर खत्म होगा?
’जयप्रकाश नवीन, नालंदा, बिहार

जान ही जहान

ज्यों ज्यों तेईस जुलाई नजदीक आ रही है, त्यों-त्यों यह आशंका बलवती होती जा रही है कि इस साल भी ओलंपिक का आयोजन हो पाएगा या नहीं, क्योंकि महामारी ने विश्व के दृश्य-पटल को बदल कर रख दिया है। उत्तर कोरिया ने तो इन खेलों में भाग नहीं लेने की आधिकारिक घोषणा भी कर दी है। खुद जापान में महामारी बढ़ती जा रही है। आगंतुकों एवं दर्शकों पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया है।

ओलंपिक मशाल वाली रैली को भी रद्द कर दिया गया है। इतना ही नहीं, जल पोलो टीम के प्रशिक्षण शिविर में कोरोना फैल जाने से उसे बंद कर दिया गया है। ऐसे में क्या अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को इन आयोजनों को एक बार फिर स्थगित करने पर गंभीरता से विचार नहीं करना चाहिए? यह ध्यान रखना चाहिए कि जीवन है तो दुनिया है।
’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर, झारखंड

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