पाक का चेहरा

पाकिस्तान तबाही की राह पर है। लोगों को खाने के लिए आटे तक के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। सब्जियों एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की ऐसी स्थिति पाकिस्तान ने कभी नहीं देखी थी।

Indo pakभारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान आपस में बातचीत करते हुए। फाइल फोटो।

पाकिस्तान के साथ ‘कट्टी के बाद फिर मिट्ठी’ वाली कहावत फिर दिखाई देती लग रही थी। हालांकि यह दोनों देशों के लिए एक अच्छी खबर थी और इसके पीछे पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को ही मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जा सकता है। लेकिन पाकिस्तान ने अपना असली चेहरा फिर दिखा दिया। जबकि पाकिस्तान तबाही की राह पर है। लोगों को खाने के लिए आटे तक के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। सब्जियों एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की ऐसी स्थिति पाकिस्तान ने कभी नहीं देखी थी।

ऐसी स्थिति में पाकिस्तान ने कपास और यार्न के भारत से आयात पर प्रतिबंध उठाने का निर्णय एक सकारात्मक संदेश का प्रतीक था। युद्ध विराम पर हो रही चर्चा भी एक अच्छे संदेश का ही लक्षण दिखाई दे रही थी। इमरान खान का भारत के प्रधानमंत्री के द्वारा पाकिस्तान दिवस पर भेजे गए संदेश का प्रत्युत्तर सुखद भाव दिखला रहा था। अगर ऐसी स्थिति बनती तो यह दोनों देशों के लिए एक सुंदर और प्रगति के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित होता। मगर वहां की कट्टरपंथी ताकतों के असर में पाकिस्तान ने एक बार फिर उन तमाम संभावनाओं को दरकिनार कर दिया।
’अशोक, पटना, बिहार

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