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आंकड़ों पर सवाल

जब लोकसभा में सरकार से आंदोलन के दौरान किसानों की मौत का आंकड़ा पूछा गया, तो केंद्र सरकार द्वारा आंकड़ा उपलब्ध न होने का जवाब किसी को भी हजम नहीं हो रहा है।

कृषि कानून रद्द करने का ऐलान होने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर अपनी ख़ुशी जाहिर की। (फोटो: पीटीआई)

तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने के बावजूद, केंद्र सरकार को किसान आंदोलन से पीछा नहीं छूट रहा है। किसान संगठनों की मांग है कि आंदोलन के दौरान किसानों की मौत का मुआवजा केंद्र सरकार को देना चाहिए। जब लोकसभा में सरकार से आंदोलन के दौरान किसानों की मौत का आंकड़ा पूछा गया, तो केंद्र सरकार द्वारा आंकड़ा उपलब्ध न होने का जवाब किसी को भी हजम नहीं हो रहा है। क्या केंद्र सरकार का तंत्र इतना कमजोर है कि उसे किसानों की मौत का आंकड़ा भी उपलब्ध नहीं हो रहा है? यह केंद्र सरकार का अपनी जिम्मेदारियों से बचने वाला जवाब है।

इसी तंत्र के सहारे पंजाब सरकार ने अपने राज्य के किसानों को मुआवजा दिया। मुआवजा देना या न देना केंद्र सरकार का अधिकार है, लेकिन आंकड़ा उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी है। संभव है कि उन मौतों में कुछ स्वाभाविक मृत्यु भी होगी, कुछ बीमारियों की वजह से हुई होगी और कुछ आंदोलन की वजह से भी हो सकती है। सरकार को मौत की वजहों के आधार पर मुआवजे की राशि तय करनी चाहिए।
हिमांशु शेखर, केसपा, गया

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