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चमक के समांतर

सड़कें देश की जीवन रेखाएं हैं, जिन पर विकास और प्रगति आधारित है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की पांच सौ चालीस किलोमीटर लंबी सड़कों को यूरोपीय शहरों की तर्ज पर खूबसूरत बनाने की योजना है, जो एक अच्छी बात है। मगर दिल्ली में उनके शासन को छह वर्ष पूरे होने के बाद भी आज दिल्ली […]

Author Updated: April 9, 2021 3:08 AM
national highwayशहरों की चमचमाती सड़कों के ऊपर प्रदूषण का पहरा रहता है।

सड़कें देश की जीवन रेखाएं हैं, जिन पर विकास और प्रगति आधारित है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की पांच सौ चालीस किलोमीटर लंबी सड़कों को यूरोपीय शहरों की तर्ज पर खूबसूरत बनाने की योजना है, जो एक अच्छी बात है। मगर दिल्ली में उनके शासन को छह वर्ष पूरे होने के बाद भी आज दिल्ली के बड़े ऐतिहासिक नगर नरेला में रामदेव चौक से सिंघू बॉर्डर तक मुख्य सड़क पर फुटपाथ तक नहीं है और कई वर्षों से यह अधूरी ही पड़ी है। इससे जनता बहुत परेशान हैं और दुर्घटनाएं होती रहती हैं। कई जगहों पर मैनहोल खुले और टूटे पड़े हैं, शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं, गति अवरोधक भी गलत जगह पर बने हैं और मुख्य चौराहे पर खतरनाक गड्ढे दिख जाते हैं। यही हाल सफियाबाद रोड, गोंडा रोड बांकनेर और अन्य सड़कों और चौराहों का भी है।

दिल्ली के और भी इलाके ऐसी समस्या से दो-चार होंगे। इन सड़कों के चौड़ीकरण के साथ इन्हें अतिक्रमण और गलत पार्किंग से भी मुक्त करना बहुत जरूरी है, ताकि जाम न लगे। अन्य सभी फुटपाथों का भी बुरा हाल है। इसलिए इनके सौंदर्यीकरण से पूर्व इनका सही सुधार और विकास बहुत जरूरी है तभी जनता को कुछ राहत मिल सकती है।
’वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली

बचत पर नजर
छोटी बचत पर ब्याज दरों को कम करने का फैसला केंद्र सरकार को अगले दिन ही बदलना पड़ा। फैसला बदलने के निहितार्थ कुछ भी रहे हों, पर यह खबर छोटे निवेशकों के लिए राहत भरी है। छोटी बचत करने वाला अपनी रकम सामान्यतया कर बचत और भविष्य की आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए जमा करता है। वरिष्ठ नागरिक भी अपनी आय का जरिया बनाए रखने के लिए विभिन्न जमा योजनाओं में निवेश करते हैं। सामाजिक सरोकार की दृष्टि से भी सरकार को इन स्कीमों में ब्याज की दरों को यथावत रखना चाहिए।
’ललित महालकरी, इंदौर, मप्र

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