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इंसाफ का संदेश

जिस तरह से नौ मिनट तक उसने फ्लॉयड का गला अपने घुटनों से दबाए रखा, उसे सांस लेने नहीं दिया, वह मानव इतिहास में एक सबसे बर्बर घटना के रूप में याद रखा जाएगा।

court activismव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए अदालत ने अपनी सक्रियता दिखाई। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस आर्काइव)

अमेरिका में मिनियापोलिस अदालत का फैसला आने के कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने अपने देश में जड़ जमा चुके व्यवस्थागत नस्लवाद से छुटकारा पाने के बारे में अमेरिकियों से अपील कर रहे थे। इसी बीच जॉर्ज फ्लॉयड हत्या मामले में जूरी का फैसला आ गया और गोरे पुलिस अफसर डेरेक चौविन को दोषी करार दिया गया।

निश्चित रूप में यह फैसला उन हजारों काले अमेरिकियों के साथ न्याय के रूप में देखा जाएगा, जो रंगभेद का शिकार होकर, गोरे अमेरिकियों के हाथों प्रताड़ित होकर मारे गए। कहा जा रहा है कि दोषी पुलिसकर्मी को चालीस साल तक जेल की सजा हो सकती है। अच्छा होता उसे और सख्त और तकलीफदेह सजा दी जाती, क्योंकि जिस तरह से नौ मिनट तक उसने फ्लॉयड का गला अपने घुटनों से दबाए रखा, उसे सांस लेने नहीं दिया, वह मानव इतिहास में एक सबसे बर्बर घटना के रूप में याद रखा जाएगा। उस घटना के बाद हाल में ही दस दिन पहले बीस वर्षीय युवक डाउनटे राइट को गोरी महिला पुलिसकर्मी ने गोली मार दी थी। उसे भी कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर, झारखंड

संरक्षण की दरकार
सफेद उल्लू, ओव्लेट, ईगल उल्लू, मोटेल वुड उल्लू, ब्राउन फिश उल्लू आदि में बार्न आउल (हवेली का उल्लू) नामक उल्लू की प्रजाति विलुप्ति कगार पर है। सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों में उल्लू प्रजाति जो कि विलुप्त थी, मिली। खंडवा और बुरहानपुर के खकनार जंगल में भी दुर्लभ वन उल्लूक को देखा गया था। छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने भी फ्रॉस्ट आउटलेट दुर्लभ प्रजाति की खोज में अभियान चलाया था। इस जंगली उल्लू का नाम खोजकर्ता के नाम पर ब्लोविट रखा गया था। वर्ष 1998 इस उल्लू को महाराष्ट्र के जंगलों में फिर से देखा गया था।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने सन 1916 में जीव-जंतुओं की रक्षा के लिए विशेष अभियान के अंतर्गत कनाडा से प्रवासी पक्षियों के बारे में एक संधि की थी, जिसके फलस्वरूप वन्य उल्लुओं को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण प्राप्त हुआ था। जैव विविधता बोर्ड के साथ वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं, वन विभाग को जंगलों के नजदीक रहने वाले रहवासियों द्धारा खोज, उनकी सुरक्षा, आहार के लिए मिल कर सहयोग देना होगा, ताकि दुर्लभ उल्लू प्रजातियों को बचाया जा सके।
’संजय वर्मा ‘दृष्टि’, मनावर, धार, मप्र

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