पोषण के बिना

जनसंख्या और बेरोजगारी की जड़ों को समझ कर उनका हल निकालना एक बड़ी चुनौती है और इन समस्याओं का मुकाबला करना जरूरी है, ताकि पोषण सप्ताह जैसे कार्यक्रमों को वास्तविक सफलता मिल सके।

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देश में विटामिन ए और जिंक की कमी के कारण भी बच्चों की मौत हो रही है। (फाइल फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

मनुष्य की पहली संपत्ति उसका स्वास्थ्य है और यहां पर पौष्टिक भोजन मनुष्य को इस संपत्ति का मालिक बनाता है। कुछ समय पहले भारत खाने की आदतों और पोषण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ‘राष्ट्रीय पोषण सप्ताह’ मना रहा था। इस वर्ष एकीकृत स्वास्थ्य ने कल्याण परिषद के सहयोग से भारत पोषण सप्ताह को ‘शुरू से ही स्मार्ट फीडिंग’ विषय के साथ मनाने का फैसला किया था।

पोषण प्रश्नोत्तरी और स्वस्थ खाएगा इंडिया आदि कार्यक्रमों की मदद से सरकार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही थी। लेकिन यहां सवाल यह भी था कि जागरूकता पैदा करना, कार्यक्रम आयोजित करना क्या काफी होगा, जब कुछ लोग पोषण और भोजन के अभाव से पीड़ित हैं?

भूख सूचकांक के अनुसार भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर है, जो दर्शाता है कि भूख का स्तर भारत में गंभीर है। यह देखते हुए सरकार इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन कुछ चीजें इस समस्या का समाधान नहीं करने दे रही है। जनसंख्या और बेरोजगारी की जड़ों को समझ कर उनका हल निकालना एक बड़ी चुनौती है और इन समस्याओं का मुकाबला करना जरूरी है, ताकि पोषण सप्ताह जैसे कार्यक्रमों को वास्तविक सफलता मिल सके। वरना सबसे बड़ी युवा आबादी होने का दावा पोषण के अभाव में क्या नतीजे देगी, यह समझना मुश्किल नहीं है।
’निखिल रस्तोगी, अंबाला कैंट, हरियाणा

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