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थोड़ी राहत की बात यह है कि अस्पतालों में अफरातफरी कम हुई है और दवाइयों और ऑक्सीजन की कमी पहले जैसी नहीं है। इससे यह संकेत मिलता है कि संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार होने वाले लोगों की संख्या घटी है और केंद्र व राज्य सरकारों की कोशिशों से इंतजाम भी बेहतर हुए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वैक्सीन को लेकर जारी की नई गाइडलाइन (फोटो क्रेडिट- पीटीआई)

महामारी की दूसरी लहर पर काबू पाने की कोशिशें जोरों पर हैं। लगातार ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जा रही है। इसी के समांतर संक्रमण दर भी घट रही है। कई दिनों से जारी गिरावट का यह दौर संतोषजनक है। अब कई बार नए मामलों की संख्या तीन लाख से कम भी दर्ज की जा रही है। संक्रमण की वजह से होने वाली मौतों में भी कमी आ रही है।

बीते दिनों दस राज्य- महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश में लगभग तीन चौथाई मौतें हुई हैं। ये राज्य संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित भी हैं, लेकिन ठीक होने वाले लोगों की बढ़ती संख्या और नए मामलों में कमी के रुझान को देखते हुए कहा जा सकता है कि महामारी की दूसरी लहर को रोकने के प्रयास सही दिशा में हो रहे हैं। इसके बावजूद हमें किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए और न ही इन रुझानों से संतुष्ट होना चाहिए, क्योंकि रोजाना हो रही मौतों की तादाद अभी भी चार पौने चार हजार के स्तर पर है।

थोड़ी राहत की बात यह है कि अस्पतालों में अफरातफरी कम हुई है और दवाइयों और ऑक्सीजन की कमी पहले जैसी नहीं है। इससे यह संकेत मिलता है कि संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार होने वाले लोगों की संख्या घटी है और केंद्र व राज्य सरकारों की कोशिशों से इंतजाम भी बेहतर हुए हैं।

देश के अनेक हिस्सों में पाबंदियां और सुरक्षा के उपायों के अमल पर जोर दिया जा रहा है। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि निर्देशों का पालन ठीक से हो। जरा-सी लापरवाही बड़े संकट का कारण बन सकती है। पिछले साल के आखिरी और इस साल के शुरुआती महीनों में अगर सतर्कता और सजगता में लापरवाही नहीं होती तो दूसरी लहर का हमला इतना भयानक नहीं होता। कोरोना के साथ कवक संक्रमण के बढ़ते मामले बेहद चिंताजनक हैं। अनुभवों से सीख लेते हुए हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बचाव में कोई ढील नहीं आए। अंधविश्वास और अफवाह ने भी हमारी चुनौती बढ़ा दी है।

ऐसे में जागरूकता के निरंतर प्रयास की आवश्यकता बनी हुई है। विभिन्न कारणों से टीकाकरण अभियान में शिथिलता आई है। देश में टीकों का उत्पादन बढ़ाने से लेकर बाहर से आयात करने तक अनेक विकल्पों को खंगाला जा रहा है। हमें संयम और हौसले से महामारी के खिलाफ जंग जारी रखनी है।
’भूपेंद्र सिंह रंगा, हरियाणा

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