महंगाई से आगाज

पिछले माह केंद्र और राज्य सरकारों ने ईंधन पर लगने वाले करों की दरों में कटौती की थी, जिससे अनुमान लगाया जा रहा था कि आगामी दिनों में जनता को महंगाई से राहत मिल सकती है। पर दिसंबर ने महंगाई से आगाज करते हुए इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

Jansatta Editorial
खाने-पीने की लगभग सभी वस्तुओं की कीमतों में बेलगाम बढ़ोतरी ने आम लोगों के सामने बहुस्तरीय चुनौती खड़ी कर दी है।

वर्ष 2021 के अंतिम माह दिसंबर की शुरुआत महंगाई के साथ हुई। जनता के महंगाई रूपी घाव पर दिसंबर ने नमक डालने का काम किया है। पता चला है कि आज से माचिस की डिबिया भी महंगी हो गई है। लगभग दशकों बाद इसकी कीमत में इजाफा हुआ है। इसी तरह कामर्शियल सिलिंडर, फोनों और चैनलों की दरें भी गतिमान होती प्रतीत हो रही हैं।

पिछले माह केंद्र और राज्य सरकारों ने ईंधन पर लगने वाले करों की दरों में कटौती की थी, जिससे अनुमान लगाया जा रहा था कि आगामी दिनों में जनता को महंगाई से राहत मिल सकती है। पर दिसंबर ने महंगाई से आगाज करते हुए इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

बतौर नागरिक अब लगने लगा है कि दिनचर्या के अन्य जरूरी बदलावों के साथ ही महंगाई दर में हो रहे बदलावों को स्वीकार करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है।
गौरव दीक्षित, नोएडा

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