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गतिशीलता की राह

आम लोग आर्थिक रूप से खुद को आत्मनिर्भर बनाते हैं और अपने समाज और देश के विकास के बारे में भी चिंतन करते हैं। वहीं खाली बैठा इंसान एक सीमित सोच के दायरे में कैद रहता है।

nature and responsibilityमनुष्य की कल्पनाशीलता विशाल है, जरूरत इसका सकारात्मक उपयोग की है। (फोटो स्रोत: गेटी इमेजेज)

मनुष्य जन्म से मृत्यु तक अपने आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हमेशा गतिशील रहता है। जीवन में गतिशीलता के साथ-साथ कुछ नया आयाम बने, इसकी चाहत हर मनुष्य के अंदर होती है। गतिशीलता और आवश्यकता जीवन की वह धुरी है, जिसके इर्द-गिर्द जीवन घूमता है। चाहे वे घरेलू काम में व्यस्त रहने वाली महिलाएं हों, विद्यार्थी हों, नौजवान हों या फिर मजदूर और किसान। ज्यादातर लोग हमेशा सकारात्मक विचार से लबरेज रहते हैं।

आम लोग आर्थिक रूप से खुद को आत्मनिर्भर बनाते हैं और अपने समाज और देश के विकास के बारे में भी चिंतन करते हैं। वहीं खाली बैठा इंसान एक सीमित सोच के दायरे में कैद रहता है। इससे न सिर्फ उसका मानसिक विकास अवरुद्ध होता है, बल्कि निरर्थक और नकारात्मक बातों की ओर उसका ध्यान अधिक जाता है और वह अपने आसपास के लोगों को भी कुंद करता है। व्यस्तता और गतिशीलता इंसान को नकारात्मकता से बचा कर रचनात्मक बनाती है।
’एस कुमार, लालगंज, वैशाली, बिहार

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