अस्पतालों की आग

हादसे इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि पिछली घटनाओं से सरकारें कोई सबक नहीं सीख रही हैं। राज्य सरकारों को सभी अस्पतालों का सुरक्षा ऑडिट और बिजली सुरक्षा संबंधी ऑडिट अनिवार्य कर देना चाहिए

Author नई दिल्ली | May 3, 2021 2:51 AM
Maharashtra, Fireमहाराष्ट्र के पालघर स्थित विरार के एक कोविड अस्पताल में लग गई आग।

कोरोना संक्रमित मरीजों को दोहरी मार पड़ रही है। सारे अस्पताल कोरोना मरीजों से भरे हैं। आक्सीजन की कमी से लोग दम तोड़ रहे हैं। अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं भी मरीजों को मौत के मुंह में धकेल रही हैं। अब गुजरात के भरूच में एक अस्पताल में आग से बीस लोग मर गए। पिछले महाराष्ट्र और गुजरात के अस्पतालों में आग की घटनाएं बढ़ी हैं। सवाल है इन मौतों के लिए किसको जिम्मेदार ठहराया जाए। इस तरह के हादसे इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि पिछली घटनाओं से सरकारें कोई सबक नहीं सीख रही हैं। राज्य सरकारों को सभी अस्पतालों का सुरक्षा ऑडिट और बिजली सुरक्षा संबंधी ऑडिट अनिवार्य कर देना चाहिए, ताकि मरीजों की जान न जाए।
’आरके शर्मा, दिल्ली

कैसा मंजर है ये!
कोरोना की दूसरी लहर से हालात बदतर हो गए हैं। सरकारी दावों और चिकित्सा व्यवस्था की हकीकत उजागर हो चुकी है। हर सुबह किसी न किसी जानकार की विदाई की सूचना मिल रही है। लोग पीड़ित परिजनों के लिए आॅक्सीजन सिलेंडर और वेंटीलेटर युक्त बिस्तर वाला अस्पताल तलाशते फिर रहे हैं। ‘किसी भी तरह जुगाड़ करवा दो’ कहना सामान्य बोलचाल में शामिल हो गया है। अस्पातालों में बिस्तरों, दवाइयों से लेकर आॅक्सीजन की कालाबाजारी का खेल जोरों पर है। जबकि विसेषज्ञों का कहना है कि अभी चरम तो आना बाकी है। इस बार तो वह देखने को मिल रहा है, जो आंखें कभी नहीं देखना चाहेंगी।

फुटपाथों पर दाह संस्कार के लिए इंतजार करती लाशों के अंबार देख लिए। अपनेपन का दंभ भरने वाले ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। बुजुर्ग कंधे बेटों के लिए आॅक्सीजन सिलेंडर ढोहते फिर रहे हैं। इससे भी ज्यादा और क्या देखें। एंबुलेंस के अभाव में रेहड़ी, आॅटो की छत तक पर शव ले जाए जा रहे हैं। शव रखे बेड पर ही जीवित महिला को इलाज के लिए इंतजार करते देख लिया। जौनपुर वाले बाबा को लू के थपेड़ों के बीच साइकल पर अपनी जीवन संगनी के शव को ढोहते देख लिया। श्मशान घाटों में दलाल सक्रिय हैं और घंटों का इंतजार है। इससे ज्यादा विडंबना और क्या होगी!
’सुशील कुमार ‘नवीन’, हिसार

कैसा अपराध?
जनेताओं का चरित्र भी गजब का होता है। जब सत्ता से दूर होते हैं तो लोकतंत्र, मानवाधिकार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वकालत करते हैं। जब सत्ता में आ जाते हैं तो उनके खिलाफ व्यक्त किए गए हर विचार उन्हें चुभने लगते हैं। आलोचनाओं में उन्हें राष्ट्रविरोधी साजिश नजर आने लगती है। कोरोना की दूसरी लहर से देश कराह रहा है। चारों ओर कोहराम मचा है। स्वास्थ्य सेवा का ढांचा ध्वस्त हो चुका है। ऐसे में इसकी शिकायत करना और सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात कहना क्या दंडनीय अपराध हो जाता है? शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शिकयतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई अदालत की अवमानना होगी। देखें इस आदेश को सत्तारूढ़ दल मानता है या अपना विशेषाधिकार का प्रयोग करके अपनी आलाचना करने वालों को कुचलना जारी रखता है?
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

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