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महामारी से बड़ी समस्या

लोगों में हताशा, रक्तचाप, चिड़चिड़ापन, मोटापा जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। घर में बंद रह कर काम करने से लोगों के स्वभाव में चिड़चिड़ाहट बढ़ रही है।

दिल्ली में पूर्ण कर्फ्यू (फाइल फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

कोरोना महामारी की दूसरी लहर अधिक जानलेवा और गंभीर है। पिछले एक साल से लगभग पूरी दुनिया इस संकट से जूझ रही है। कई निजी और सरकारी कंपनियां घर से काम के तहत ही संचालित हो रही हैं। महामारी से कर्मचारियों को बचाने के लिए यह जरूरी भी है। मगर इसका लोगों पर बहुत गहरा और बुरा असर पड़ रहा है। घर से काम के कारण लोग मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बन रहे हैं।

लोगों में हताशा, रक्तचाप, चिड़चिड़ापन, मोटापा जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। घर में बंद रह कर काम करने से लोगों के स्वभाव में चिड़चिड़ाहट बढ़ रही है। इसका दुष्प्रभाव कहीं न कहीं परिवार वालों को भी देखना पड़ रहा है। बच्चों से, पत्नी से, अन्य सदस्यों के बीच झगड़ा होना आम हो गया है। लोग छोटी-छोटी बातों पर आपस में उलझने लगे हैं। यह समस्या कोरोना से भी ज्यादा घातक साबित हो रही है। पहले परिवार वाले अक्सर कहा करते थे कि ऑफिस की बातें वही छोड़ आया करो। मगर अब ऑफिस घर में ही होने के कारण पूरे परिवार को इसका दुष्प्रभाव झेलना पड़ रहा है।
’अंकित श्वेताभ, दिल्ली विवि, दिल्ली

खतरे की भीड़
शहर और कस्बों में स्थित बैंकों में समर्थन मूल्य पर खरीदी, रबी उपज की राशि, सीएम और पीएम किसान योजना के तहत दी जाने वाली राशि इसी माह किसानों के खाते में जमा हो रही है। इसके अलावा मानसूनी दस्तक के मद्देनजर खरीफ फसल की तैयारियों के लिए बाजारों में और बैंकों में किसानों की लगातार भीड़ बढ़ रही है जो सुबह नौ बजे से पांच बजे तक यथावत बनी रहती है।

गौरतलब है कि इस भीड़ में ऐसे कई युवक और युवतियों की संख्या भी होती हैं जिन्हें अभी टीका नहीं लगा है। पूर्णबंदी के चलते कुछ दुकानें बंद होने या अवैध रुप से खुलवाने पर किसानों को दुकानदारों से नकदी लेनदेन करने के लिए बैंकों तक जाना जरूरी होता है और ऐसी आवाजाही से संक्रमण का खतरा रहता है। ऐसे में बैंकों में हो रहे जमावड़े पर अब नियंत्रण जरूरी हो गया है।
’बीएल शर्मा “अकिंचन”, उज्जैन

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