धरती की खातिर

सरकारों ने महामारी के गंभीर नुकसान से जनता को परिचित कराते हुए इससे निपटने के लिए जिस तरीके का जागरूकता अभियान चलाया, इसी तरीके से सरकारों को जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए प्रयास करने होंगे।

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हिमनदों के पिघलने-सिकुड़ने की समस्या दुनिया के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि चौतरफा है। हमारे देश में गंगोत्री के अलावा पिंडारी और शिगरी नाम के दूसरे बड़े हिमनद पिघले हैं।

हाल ही में आइपीसीसी ने जलवायु परिवर्तन पर एक रिपोर्ट जारी करते हुए समूचे विश्व को इस बात से आगाह किया है कि अगर हमने समय रहते गंभीरता से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए काम नहीं किया तो भविष्य में इसके बहुत भयानक परिणाम होंगे रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में वैश्विक तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है और अगले बीस सालों तक यह डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा। यह और बढ़ा तो पृथ्वी पर जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाएगा और जल जैसी बुनियादी चीजों का भी अकाल पड़ सकता है।

यह बात जान कर हैरानी होगी कि रिपोर्ट में वैश्विक तापमान बढ़ने का मुख्य कारण विवेकशील मानव ही है, जिसने विकास की अंधाधुंध दौड़ के चलते प्रकृति का बेहिसाब दोहन किया है, जिसका परिणाम आज यह है कि जंगल आग की जद में हैं, वहीं ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसके चलते स्वच्छ जल की कमी होती जा रही है तो वहीं समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। यही हाल रहा तो तट पर बसे शहर भविष्य में डूबने की कगार पर होंगे। इसके अलावा, बेहिसाब बारिश, जिसके चलते बाढ़, भूस्खलन जैसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।

इन सबका प्रभाव वर्तमान में मानव के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक आदि विकास पर गंभीर प्रभाव पढ़ रहा है। यह बात सही है कि जलवायु परिवर्तन का मुद्दा आज बहस से कहीं ज्यादा आगे निकल गया है। अब इस पर केवल काम करने की आवश्यकता है, इसलिए इस गंभीर और बड़ी समस्या से निपटने के लिए हम कुछ उपाय कर सकते हैं। पहला उपाय यह है कि अब केवल सम्मेलन और कागजों पर काम करने से बात नहीं बनेगी। इसके लिए सभी देशों की सरकारों को ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण करने के लिए सख्ती से नियम लागू करने होंगे। दूसरा, दीर्घकालिक नीतियां अपनाई जाएं। जैसे जीरो नेट लक्ष्य आदि। इसके अलावा, आपदा से निपटने के लिए केवल सरकारों को ही नहीं, बल्कि गैरसरकारी संगठन, निजी कॉपोर्रेट संस्थान, आमजन आदि को भी कोशिश करनी होगी।

हम सबको कुछ बुनियादी प्रयास करने होंगे। जैसे इलेक्ट्रॉनिक, सार्वजनिक और साइकिल जैसे वाहन का प्रयोग करना। प्लास्टिक का जीवन में न्यूनतम प्रयोग करें। व्यापक स्तर पर वनों की चल रही कटाई को रोकें औप वृक्षारोपण को अधिक से अधिक प्रोत्साहन दें। जलवायु परिवर्तन को बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन देना चाहिए।

सरकारों ने महामारी के गंभीर नुकसान से जनता को परिचित कराते हुए इससे निपटने के लिए जिस तरीके का जागरूकता अभियान चलाया, इसी तरीके से सरकारों को जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए प्रयास करने होंगे। पूर्व में आपदाओं से निपटने के लिए जो कानून निर्मित किए गए और समय-समय पर अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टों ने भी कुछ सुझाव दिए, तो उनको भी बेहतर प्रबंधन के साथ लागू किया जाए। तभी हम इस पृथ्वी जैसे खूबसूरत ग्रह को सुरक्षित रख पाएंगे और मानव जाति के साथ-साथ अन्य जीवों के जीवन को भी बचा पाएंगे।
’सौरव बुंदेला, भोपाल, मप्र

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