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हौसला और सरोकार

महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा से लेकर बलात्कार तक अपराध आम हैं। जबकि कोई भी महिला किसी की मां, दादी, बहन, बेटी और पत्नी हो सकती है। जहां महिलाओं को देवी कहा जाता है, वहां ऐसी क्रूर घटनाएं होना दिल तोड़ देती हैं।

नई दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज के परिजन मेडिकल ऑक्सीजन के सिलेंडर ले जाते हुए। (फोटोः पीटीआई)

एक खबर पढ़ा कि उत्तर प्रदेश में ‘ऑक्सीजन गर्ल’ नाम से मशहूर एक लड़की है, जो जरूरतमंद कोरोना रोगियों को ऑक्सीजन उपलब्ध करा रही है। यह सुन कर अच्छा लगता है कि हमारे देश में लड़कियां कई लक्ष्यों को छू रही हैं। हर क्षेत्र में उन्होंने अपने कौशल और दक्षता को साबित किया है। वे किसी भी परीक्षा का मुकाबला करने के लिए बहादुर और कुशल हैं। यह ऑक्सीजन गर्ल दूसरों के लिए एक उदाहरण है। इस महामारी में एक छोटी-सी मदद बहुत बड़ी है, क्योंकि इससे मरीजों का मनोबल बढ़ता है।

लेकिन समाज का रवैया परंपरागत तौर पर महिलाओं को लेकर अच्छा नहीं रहा है। महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा से लेकर बलात्कार तक अपराध आम हैं। जबकि कोई भी महिला किसी की मां, दादी, बहन, बेटी और पत्नी हो सकती है। जहां महिलाओं को देवी कहा जाता है, वहां ऐसी क्रूर घटनाएं होना दिल तोड़ देती हैं। सभ्य मानवता के लिए ऐसी घटनाएं शर्मनाक हैं। ऐसे कृत्यों को सामूहिक प्रयासों द्वारा कम किया जाना चाहिए। माता-पिता को अपने बच्चों और खासतौर पर बेटों को अच्छे संस्कारों के साथ पालन करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। स्कूलों में प्रारंभिक अवस्था में नैतिक शिक्षा को शामिल किया जाना चाहिए।

नरेंद्र कुमार शर्मा, जोगिंदर नगर, हिप्र

संकट के मददगार
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सीय सुविधाओं की कमी और डिग्रीधारी चिकित्सक की अनुपलब्धता होने से ग्रामीणों को झोला छाप लोगों के क्लीनिक पर मजबूरन इलाज लेना होता है। लेकिन विषाणु से संक्रमित के लिए अच्छे डॉक्टर से परामर्श जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण से बिगड़ रही स्थिति, डिग्रीधारी चिकित्सक की कमी, तीसरी लहर की संभावना और टीके की कमी के मद्देनजर झोला छाप डॉक्टरों को कोरोना से प्रारंभिक रोकथाम के उपचारार्थ विशेष प्रशिक्षण देकर फैल रहे संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है, क्योंकि कंपाउडर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को अगर उपचार में मददगार माना जाता है तो इन झोला छाप को भी प्रशिक्षित कर आपात काल की चिकित्सा में मददगार बनाया जा सकता है।

बीएल शर्मा अकिंचन, उज्जैन, मप्र

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