प्रदूषण पर सख्ती

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि पटाखों को बनाने में जहरीले रसायनों के प्रयोग पर सीबीआई की रिपोर्ट बहुत ही गंभीर है। हम इस तरह से लोगों को उनके हाल पर मरने के लिए नहीं छोड़ सकते।

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उच्चतम न्यायालय की सख्ती के बावजूद कई पटाखा निर्माता प्रतिबंधित सामग्री वाले पटाखे बना रहे हैं। (Source: @AkashvaniAIR/File photo)

आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि पटाखों को बनाने में जहरीले रसायनों के प्रयोग पर सीबीआई की रिपोर्ट बहुत ही गंभीर है। हम इस तरह से लोगों को उनके हाल पर मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रथम दृष्टया बेरियम जैसे खतरनाक तत्त्व का प्रयोग अति घातक है। पटाखों पर लेबल लगाने के मामले में भी अदालत के आदेशों की अनदेखी की गई है। दो जजों की पीठ ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने जब्त किए गए पटाखों में बेरियम साल्ट जैसे हानिकारक रसायन पाए। हिंदुस्तान फायरवर्क्स और स्टैंडर्ड फायरवर्क्स जैसे निर्माताओं ने बड़ी भारी मात्रा में बेरियम खरीदा और पटाखों में प्रयोग किया।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि लोगों को इस तरह सरेआम मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। चूंकि विषय यही चल रहा है तो एक बात पर और ध्यान देना बहुत जरूरी है। विगत कई वर्षों से हम देखते आ रहे हैं कि पटाखों पर हिंदू देवी-देवताओं के चित्र छाप कर उनके अपमान के प्रयास लगातार जारी हैं।

इन पटाखों पर देवी-देवताओं के चित्र या किसी भी धर्म विशेष से संबंधित चित्र न छापे जाएं, क्योंकि जब पटाखा आग लगाने के बाद फटता है तो यह चित्र क्षत-विक्षत होकर दिखाई देने पर हमारे मन में एक विचित्र सी खेद की अनुभूति होती है जिसे शब्दों में व्यक्त कर पाना बहुत मुश्किल है।
’जवाहर डोसी ‘पीयूष’, उज्जैन

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