ताज़ा खबर
 

दूरी की दीवारें

आज की भागदौड़ और व्यस्त जीवनशैली में किसी के पास इतना समय नहीं है कि सभी रिश्तेदारों से हर रोज मिले। ये अवसर केवल शादी समारोह या किसी अन्य पारिवारिक समारोहों द्वारा ही मिलता है। लेकिन कोरोना बीमारी ने यह अवसर भी लोगों से छीन ही लिया।

भारत में पाए जा रहे कोरोना के वैरिएंट को WHO ने घातक बताया है। (पीटीआई)।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं और वह समूहों में रहता आया है। लेकिन कोरोना के दौर में सामाजिक दूरी ने हमारे रिश्तों और रोजमर्रा की बातचीत को बहुत प्रभावित किया है। जब भी कोई बीमारी या संक्रमण फैलता है तो ज्यादातर लोग सामाजिक नियमों का पालन करने लगते हैं। कोरोना से बचाव के लिए नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन इस बीच हम कब अपने करीबी मित्रों और रिश्तेदारों से दूरी बना बैठते हैं, इसका पता नहीं चल पाता।

इस काल में हम अपने से ज्यादा दूसरों पर नजर रख रहे है। दिमाग में सवाल घूमता रहता है कि जो व्यक्ति हमारे साथ काम कर रहा है, कहीं उसे कोई बीमारी तो नहीं। अगर किसी व्यक्ति को साधारण रूप से भी छींक आई है तो हम उसे टोकने से खुद को रोक नहीं पाते। इससे रिश्तों में एक अनकही दूरी बनने लगी है। शहरों में तो यह आम बात है कि सिर्फ अपने आप से मतलब रखना लोगों की आदत में शुमार हो गया है, लेकिन अब वही स्थिति और ज्यादा जटिल हो गई है। हो सकता है कि मौजूदा भावनात्मक दूरी को मजबूत करने में उसी की भूमिका हो। पहले लोग कम से कम एक-दूसरे का हाल पूछ लेते थे, लेकिन अब तो वह भी न के बराबर हो गया। पहले बच्चे मैदानों में एक दूसरे के साथ घंटों खेलते थे, स्कूल में अपने दोस्तों और अध्यापकों से मिलते और बातें करते थे, लेकिन अब यह सब केवल ऑनलाइन देखने को मिलता है। इससे सामाजिक संबंध तो खत्म होते जा रहे हैं।

हमारे समाज में मनुष्य बहुत सारे संबंधों में बंधा हुआ है। महामारी के कारण सरकार ने शादियों या अन्य पारिवारिक समारोहों में व्यक्तियों की संख्या तक तय कर दी। आज की भागदौड़ और व्यस्त जीवनशैली में किसी के पास इतना समय नहीं है कि सभी रिश्तेदारों से हर रोज मिले। ये अवसर केवल शादी समारोह या किसी अन्य पारिवारिक समारोहों द्वारा ही मिलता है। लेकिन इस बीमारी ने यह अवसर भी लोगों से छीन ही लिया। लोगों का एक दूसरे पर विश्वास भी कमजोर पड़ने लगा है। यह सब देखते हुए ऐसा लग रहा है कि यह महामारी हमारी सोच और संबंधों को बदल रहा है। अगर यह सब ऐसा ही रहा तो यह संक्रमण सामाजिक दृष्टिकोण और संबंधों में और भी बड़े बदलाव ला सकता है।
’अंजली नर्वत, खेड़ी कलां, हरियाणा

Next Stories
1 आभासी संजाल
2 स्त्री की सेहत
3 अंधविश्वास की बीमारी
ये पढ़ा क्या?
X