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सदन की मर्यादा

लोग बहिर्गमन कर जाते हैं और सत्ता पक्ष बिना बहस के विभिन्न महत्त्वपूर्ण विधेयक पास करवा लेता है। यहां तक कि बजट सत्र में भी यही हुआ। बिना बहस के बजट पास हो गया। यह सब लोकतंत्र की विफलता का लक्षण है।

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राज्यसभा में शीतकालीन सत्र शुरू हो चुका है(फोटो सोर्स: ANI)।

पिछले संसद सत्र के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के कुछ सांसदों की अनुशासनहीनता के कारण बारह सांसदों को निलंबित करने पर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। यह सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के सौहार्दपूर्ण ढंग से कार्रवाई चलाने पर सवालिया निशान लगाने वाला है! जब से वर्तमान भाजपा तथा सहयोगी दलों की प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनी है, तब से वह तो अहंकार के चलते तथा विपक्ष अपने कमजोर होने के कारण तकरार करते रहे हैं। विपक्ष को बोलने की अनुमति नहीं दी जाती।

वे लोग बहिर्गमन कर जाते हैं और सत्ता पक्ष बिना बहस के विभिन्न महत्त्वपूर्ण विधेयक पास करवा लेता है। यहां तक कि बजट सत्र में भी यही हुआ। बिना बहस के बजट पास हो गया। यह सब लोकतंत्र की विफलता का लक्षण है।

क्या कोई ऐसा रास्ता नहीं निकाला जा सकता, जिससे सत्ता पक्ष तथा विपक्ष इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति से बच सकें और आपस में तालमेल करके तथा संसद की गरिमा बनाते हुए जनप्रतिनिधि के तौर पर विभिन्न विषयों पर एक-दूसरे को चोट पहुंचाए बिना बहस करें!
’शामलाल कौशल, रोहतक

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