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अनियंत्रित आभासी दुनिया

कभी-कभी सोशल मीडिया पर की गई अभिव्यक्ति देश की संप्रभुता या किसी व्यक्ति की गरिमा को चोट पहुंचा रही है। इसीलिए सरकार अपने नए नियम के द्वारा सोशल मीडिया पर अंकुश लगाना चाहती है।

केंद्र ने व्हाट्सअप को नोटिस भेज कहा- कंपनी अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी को करे रद्द (एक्सप्रेस फोटोः अंकिता गर्ग)

‘अभिव्यक्ति की सीमा’ (संपादकीय, 26 मई) पढ़ा। अपनी बातों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया सबसे सशक्त माध्यम के रूप में उभर चुका है। देश में वाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर सर्वाधिक लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफार्म है। लेकिन आजकल कई मौकों पर सोशल मीडिया के उपयोग से अधिक दुरुपयोग किया जा रहा है। सोशल मीडिया कंपनियों के साथ अनैतिक और गैरकानूनी काम करने वाले मुद्दों का एक इतिहास जुड़ा हुआ है। देश में घटित सभी दंगा-फसाद में सोशल मीडिया की भूमिका बढ़-चढ़ कर रही है।

कभी-कभी सोशल मीडिया पर की गई अभिव्यक्ति देश की संप्रभुता या किसी व्यक्ति की गरिमा को चोट पहुंचा रही है। इसीलिए सरकार अपने नए नियम के द्वारा सोशल मीडिया पर अंकुश लगाना चाहती है। फेसबुक ने सरकार की बात मान ली है, लेकिन अन्य सोशल मीडिया मंचों से अभी तक सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। इस मसले पर भारत सरकार की चेतावनी को नजरअंदाज करना सोशल मीडिया की मनमानी को दर्शाता है। वाट्सऐप भी अपनी नीति में बदलाव लाकर लोगों की निजता को खतरे में डालने पर आमादा है।
दरअसल, सोशल मीडिया कंपनियों के पास एक विशाल ग्राहक आधार है।

फेसबुक के साथ 33.6 करोड़, वाट्सऐप के साथ 40 करोड़ एवं ट्विटर के साथ सात करोड़ भारतीय जुड़े हुए है। इन विशाल समुदाय के सहारे सोशल मीडिया हमारी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने की स्थिति में आ चुका है। भारत को स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विकसित करने होंगे। स्वदेशी प्लेटफॉर्म देश की संप्रभुता, एकता और सामाजिक सौहार्द के प्रति अधिक जिम्मेदार होगा।
’हिमांशु शेखर, गया, बिहार

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