साख का सवाल

केंद्र सरकार ने छोटी बचत योजनाओं में कई की गई कटौती को वापस लेकर भी अपनी किरकरी ही कराई है।

Smallसांकेतिक फोटो।

केंद्र सरकार ने छोटी बचत योजनाओं में कई की गई कटौती को वापस लेकर भी अपनी किरकरी ही कराई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अपने बजट प्रावधानों में इन बचत योजनाओं में 1.1 प्रतिशत की बड़ी कटौती करनी ही नहीं चाहिए थी। यह उनका अदूरदर्शिता भरा फैसला था। फिर बजट लागू होने के पहले ही दिन इस कटौती को वापस लेकर उपहास का पात्र भी बन गईं। विपक्ष को बैठे -बिठाए एक मुद्दा मिल गया।

विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार की नीयत में खोट है और राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने यह कटौती वापस ली है और बहुत मुमकिन है कि विधानसभाओं के चुनाव समाप्त होने पर ये कटौती लागू कर दी जाएगी। वित्त मंत्री ने फिर अपरिपक्वता का परिचय देते हुए सफाई देने की असफल कोशिश करते हुए इसे मानवीय चूक करार दिया है। इस घटनाक्रम से सरकार ने अपनी विश्वसनीयता पर खुद ही प्रश्रचिह्न लगा लिया है।
’सतप्रकाश सनोठिया, दिल्ली


ईवीएम पर सवाल

फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी, नीदरलैंड, अमेरिका जैसे उन्नत देश नासमझ थोड़े ही हैं कि चुनाव में ईवीएम मशीन का इस्तेमाल करने के बाद पुन: मतपत्रों के इस्तेमाल पर वापस आ गए? असम के करीमगंज में भाजपा उम्मीदवार की कार में मिली ईवीएम को क्या महज पीठासीन अधिकारी की भूल मान लिया जाना चाहिए? ये तो एक मामला था जिस पर लोगों की नजर चली गई और सामने आ गया। न जाने इस तरह के कितने और धोखाधड़ी के मामले हुए होंगे।

लोकतंत्र को पारदर्शिता से चलाना बहुत कठिन काम है। जब सभी विपक्षी पार्टियां मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग कर रही हैं तो सिर्फ एक पार्टी क्यों मुखर होकर विरोध कर रही है? जब मशीन की विश्वसनीयता पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं तो इसमें विपक्ष की मांग को मानने में हर्ज क्या है? विपक्ष केवल ट्वीट करके विरोध करना बंद करे और एकजुट हो। अगला कोई भी चुनाव अगर मतपत्र से नहीं होता तो संपूर्ण विपक्ष उसका बहिष्कार करे। केवल जुबानी विरोध से ईवीएम की लूट को नहीं रोका जा सकता।
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

Next Stories
1 दयनीय हालत
2 पाक का चेहरा
3 दरकिनार लोकतंत्र
यह पढ़ा क्या?
X