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स्वार्थ का चरम

ऐसे संकट काल के समय में आपदा को अपने स्वार्थ वाले अवसर में बदलने वाले समाज के तथाकथित कुछ दुश्मनों ने ऐसा कृत्य किया है, जिससे हमारा सिर शर्म से झुक गया है।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

कोरोना की वैश्विक महामारी में कहीं सांसों के साथ संघर्ष करते हुए कई लोग मौत के आगोश में समा रहे है, परिवारों को मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो कहीं इस दुखद परिस्थितियों में खुद ही जूझना पड़ रहा है। कोई परिवार जैसे-तैसे अपनी मजबूरियों को छिपाते हुए अपने परिजन के मृत शरीर को श्मशान घाट तक पहुंचा रहे हैं और इस वैश्विक महामारी में अंतिम संस्कार के माध्यम से अपने पारिवारिक, मानवीय ऋण को उतार रहे हैं। ऐसे संक्रमण काल में कई सामाजिक संस्थाएं अपने-अपने हिसाब से अपने स्तर पर मदद कर रही हैं।

ऐसे संकट काल के समय में आपदा को अपने स्वार्थ वाले अवसर में बदलने वाले समाज के तथाकथित कुछ दुश्मनों ने ऐसा कृत्य किया है, जिससे हमारा सिर शर्म से झुक गया है। एक दुखद घटना सामने आई उत्तर प्रदेश में बागपत के बड़ौत शहर में। इस घटना ने मानव समाज में इंसानियत को कलंकित कर दिया है, जिसमें पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा जो श्मशान घाट ले जाने वाले शवों पर से उतरे कपड़ों को चोरी कर करके बाजार में ऊंचे दाम पर बेचने का काम कर रहा था। इस गिरोह ने मानवता के नाम पर दाग लगा दिया। ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में फिर ऐसी कोई घटना न हो, जिससे मानव समाज को शर्मसार होना पड़े।
’प्रकाश हेमावत, रतलाम, मप्र

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