प्लास्टिक पर पाबंदी

इस विषय में कुछ राज्यों ने प्रयास भले किए हो, पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कमार ने कुछ ऐसे साहसिक कदम उठाए हैं जिनका अनुकरण देश के सभी राज्यों को करना ही चाहिए और साथ ही दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के पड़ोसी देश भी कर लें तो हमारे व इन सभी देशों की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था में अपूर्व सुधार हो सकता है।

सिंगल यूज प्लास्टिक के कारण हो रहे पर्यावरणीय नुकसान की वजह से केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है। केंद्र सरकार के इस फैसले से सभी तरह के सिंगल प्लास्टिक यूज के उत्पादों पर रोक लग जाएगी। (एक्सप्रेस फोटो)

पालिथीन की थैलियां न केवल मानव जाति को बल्कि पशु-पक्षी, जल, जमीन, पेड़-पौधे, नदी, तालाब, हवा यानी समस्त पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचा रही हैं। पिछले तीन-चार दशक में प्रचलन में आई इन प्लास्टिक थैलियों व प्लास्टिक के दूसरे सामान ने हमें भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि संकट की गंभीरता को देखते हुए पर्यावरण हितैषियों ने इसके इस्तेमाल को रोकने के लिए अभियान चलाए हैं, जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं और सरकारों तक भी अपनी बात प्रभावी ढंग तक पहुंचा जा इसका सकारात्मक असर देखने को भी मिला है। जनता जागरूक हुई है, प्लास्टिक के नुकसान को समझा है और कुछ राज्य सरकारों ने भी इस पर प्रतिबंध भी लगाया है।

लेकिन क्या प्लास्टिक थैलियों पर लगे प्रतिबंध प्रभावी हुए? इच्छा शक्ति प्रमुख होती है और जहां इच्छाशक्ति है वहीं प्रतिबंधों का असर भी दिखाई देता है। आज भी बाजारों में प्लासिटक थैलियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। इसका कारण यह है कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जो कदम उठाए जाने चाहिए, वे नहीं उठाए जा रहे।

प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध लगने के बाद कुछ दिन तो सरकारी अमला सक्रिय रहा, पर बाद में जैसे सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट आया। कागज व कपड़े के थैले बनाने वालों को प्रोत्साहन, जेल में बंद कैदियों से थैले व थैलियां बनवाना, इस क्षेत्र में रोजगार करने वालों को बढ़ावा देना आदि कदम सक्रियता से उठाए जाते तो निश्चित रूप से हमे पालीथिन की समस्या से पार पा सकते थे।

इस विषय में कुछ राज्यों ने प्रयास भले किए हो, पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कमार ने कुछ ऐसे साहसिक कदम उठाए हैं जिनका अनुकरण देश के सभी राज्यों को करना ही चाहिए और साथ ही दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के पड़ोसी देश भी कर लें तो हमारे व इन सभी देशों की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था में अपूर्व सुधार हो सकता है।

बिहार में प्लास्टिक-थर्माकोल के उत्पादन, भंडारण, खरीद, बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। जो इस प्रतिबंध का उल्लंघन करेगा, उस पर पांच लाख रुपए जुर्माना होगा या एक साल की सजा या दोनों एक साथ होंगे। इस प्रतिबंध के लगने के बाद बिहार में कि प्लास्टिक की चीजों का उत्पादन लगभग सत्तर प्रतिशत घट तक गया है।

अगर देश भर में पालिथीन पर प्रतिबंध लग जाए और इस पर सख्ती से अमल हो तो सबसे बड़ा फायदा भारत की जनता को यह होगा कि वह श्वास, कैंसर, लीवर, किडनी और हृदय रोग जैसी घातक बीमारियों के शिकार होने से काफी हद तक बच सकेगी। प्लास्टिक की करोड़ों थैलियां रोजाना नदियों, समुद्र में इकट्ठी होकर जीव-जंतुओं को तो मारती व नुकसान पहुंचाती हैं।

इनके जलने से भी वायुमंडल जहरीला हो जाता है। इसलिए यह ज्यादा जरुरी यह है कि भारत के जन-साधारण प्लास्टिक की चीजों का इस्तेमाल खुद ही बंद कर दें तो उनके विरुद्ध कानून बने या न बने, भारत प्लास्टिक मुक्त हो सकता है।
’दिव्या कुमारी जैन, कोटा (राजस्थान)

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