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अब भी भारत के कुछ हिस्सों में बेटियों की कितनी है दुर्दशा

तेलंगाना में बेटे की चाहत में एक शख्स इस कदर अंधा हो गया कि उसने अपनी गर्भवती पत्नी और मासूम बेटी को जिंदा जला दिया।

Author July 24, 2017 5:19 AM
प्रतीकात्मक चित्र।

सियासी दांव
बसपा सुप्रीमो मायावती ने नैतिकता का हवाला देते हुए राज्यसभा की सदस्यता से आनन-फानन में इस्तीफा देकर राजनीतिक दांव खेला है। दरअसल, ऐसा करके वे अपनी कुंद होती दलित सियासत को नई धार देना चाहती हैं। देश की सबसे बड़ी पंचायत में किसी मुद्दे पर बोलने के अधिकार की सीमित समयावधि के नियमों को दरकिनार कर बेबुनियाद आरोप लगाते हुए इस्तीफा देकर माया ने नया सियासी समीकरण साधा है। सतही तौर पर, दलितों के बीच खिसकता जनाधार उनकी असल चिंता है। लोकसभा में बसपा का सूपड़ा साफ है और इस साल हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों में पार्टी का केवल उन्नीस सीटों पर सिमटना साफ संकेत है कि मायावती राजनीतिक जमीन खिसकने से हताश हैं। उधर रही-सही कसर भाजपा ने दलित नेता रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनवा कर पूरी कर दी। दलितों को फिर लामबंद करने के लिए इस्तीफे की यह सोची-समझी सियासी चाल क्या गुल खिलाएगी, यह तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन दलितों की मुखर पैरवी के लिए मायावती को अलोकतांत्रिक रवैये व पलायनवादी प्रवृत्ति का त्याग करना होगा।
’नीरज मानिकटाहला, यमुनानगर, हरियाणा
कातिल सोच
तेलंगाना में बेटे की चाहत में एक शख्स इस कदर अंधा हो गया कि उसने अपनी गर्भवती पत्नी और मासूम बेटी को जिंदा जला दिया। आरोपी की दो बेटियां थीं और उसे शक था कि शायद तीसरी बार भी बेटी ही होगी। सत्रह जुलाई को शराब के नशे में पहले उसने अपनी पत्नी से झगड़ा किया, फिर मिट्टी तेल छिड़क कर बीवी और पांच साल की मासूम बेटी को आग के हवाले कर दिया जिससे मौके पर ही उन दोनों की मौत हो गई। कितने अफसोस की बात है कि इक्कीसवीं सदी में जहां बेटियों का हर क्षेत्र में दबदबा बढ़ रहा है, चाहे पढ़ाई हो या खेल, वहां आज भी ऐसे छोटी मानसिकता वाले लोग बेटे की चाहत में अपनों का ही कत्ल कर रहे हैं!
इस घटना ने फिर साबित कर दिया है कि अब भी भारत के कुछ हिस्सों में बेटियों की कितनी दुर्दशा है। जन्म से पहले ही लालची डॉक्टरों से भ्रूण जांच करा कर बेटियों की हत्या कर दी जाती है। क्या इन लोगों को यह नहीं दिखता कि ओलंपिक हो या राष्ट्रमंडल खेल, देश की बेटियों ने पदक जीतकर पूरे भारत को गौरवान्वित किया है। बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीईओ जैसे पद पर आज भारत की महिलाएं हैं। यूनिसेफ की सद्भावना दूत भी भारतीय मूल की महिला है। इस सबके बावजूद कुछ लोगों की मानसिकता जस की तस है। ऐसी नकारात्मक सोच वाले लोग देश को पीछे धकेलने का काम करते हैं।
’शालिनी नेगी, बदरपुर, नई दिल्ली
चोरी की बिजली
नजफगढ़ (नई दिल्ली) के झुरझुरी गांव में बड़े पैमाने पर हो रही बिजली चोरी रोकने के लिए गई बीएसइएस की टीम पर स्थानीय युवकों ने हमला बोल दिया। इस मामले में एक इंजीनियर की भी मौत हुई है। बिजली चोरी करना और चोरी पकड़ने वालों पर हमला करना, यह पूरे देश में हो रहा है। अफसोस की बात है कि आज तक इस गंभीर समस्या का समाधान खोजने में सफलता नहीं मिली है। इस कारण बिजली चोर मुफ्त की बिजली आसानी से इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हें बिजली बिल अदा करने की चिंता नहीं है, बल्कि उनकी चिंता विद्युत मंडल या बिजली बोर्ड को रहती है। आखिर देश में बिजली की चोरी पर पूरी तरह रोक कब लगेगी?
’जयेश राणे, मुंबई

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