ताज़ा खबर
 

हार और जीत

अखाड़े में मैदान में जब दो पहलवान उतरेंगे तो एक को जीतना और एक को हारना ही पड़ता है। अ

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी को हाथ में लिए पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सरफराज अहमद। (PTI)

सरोकार का पाठ
शैक्षणिक संस्थानों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता का आॅडिट होना चाहिए कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी विकास में इनकी सार्थक भूमिका क्यों नहीं तय हो पा रही है। क्या विश्वविद्यालयों की भूमिका मात्र डिग्री बांटने तक सीमित होकर रह गई है या फिर यह अपनी सार्थकता या व्यापकता को खो चुका है? शिक्षा में दिनोंदिन हो रहे गुणात्मक ह्रास का कारण क्या है? इसके आकलन की जरूरत है। वर्तमान में प्राथमिक शिक्षा, जो व्यक्तित्व और बुनियादी ज्ञान प्राप्ति का मेरुदंड है, पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। शैक्षणिक संस्थाएं मात्र पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान अर्जन और रोजगारपरक शिक्षा का केंद्र होना चाहिए।
आज विश्वविद्यालयों को प्रासंगिक ज्ञान प्रदान करना चाहिए, जिससे हमारे उद्योग धंधे, शोध और तकनीकी संस्थानों, चिकित्सा और कृषि विज्ञान में उच्च कोटि के कौशल युक्त मानव संसाधन उपलब्ध हो सकें। केवल विज्ञान और तकनीकी में ही नहीं, बल्कि साहित्य और कला में भी उच्च कोटि के विद्वानों का सृजन हो सके। आधुनिक शिक्षा के साथ रोजगार का संबंध और मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान करना ही प्राथमिक उद्देश्य होना चाहिए। विश्वविद्यालयों को अपनी प्रासंगिकता को सिद्ध करना होगा कि उनका निर्माण किन उद्देश्यों को लेकर हुआ है और देश निर्माण में उनकी भूमिका क्या होगी। विश्वविद्यालय शिक्षा प्रदान और ज्ञान प्राप्ति के स्थान हैं, वहां से जाति और धर्म के आधार पर असमानता और राजनीति बिल्कुल बंद हो जानी चाहिए।
’देवेंद्रराज सुथार, जेएनवीयू, जोधपुर
हार और जीत
अखाड़े में मैदान में जब दो पहलवान उतरेंगे तो एक को जीतना और एक को हारना ही पड़ता है। अक्सर देखा जाता है कि जब अपनी टीम जीत जाती है तो उसे सिर आखों पर बैठा लिया जाता है और जब किसी परिस्थितिवश हार जाती है तो उसे एकदम इतना नजरों से गिरा दिया जाता है जैसे वह टीम कभी जीतेगी ही नहीं। लेकिन ऐसा कुछ नही है। हम अनेक बार जीते हैं और प्रतिस्पर्धी टीम भी हमसे कई बार हारी है। इसलिए खेल को खेल की नजर से ही देखने में खिलाड़ियों का भी मनोबल बना रहेगा और प्रशंसकों को भी इतनी ग्लानि नहीं होगी।
’शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर
खेल में खेल
इंग्लैंड में खेले गए इंडिया-पाकिस्तान क्रिकेट मैच में पाकिस्तान के तरफ से पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत को 339 रनों का लक्ष्य मिला था। इसका पीछा करते हुए पूरी भारतीय टीम 158 रनों पर ही सिमट गई। खेल में हार-जीत लगी रहती है, लेकिन इस तरह से फाइनल मैच में करारी शिकस्त मिलना कहीं न कहीं इन खिलाड़यों पर भी शक पैदा करता है। सवाल है कि जो टीम हर मैच में अच्छा खलते हुए फाइनल तक पहुंची, वह अचानक से पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में कैसे लड़खड़ा गई? खबरों की मानें तो बताया जा रहा था कि भारत-पाक मैच में करीब आठ हजार करोड़ का सट्टा भी लगा था और ऐसे में टीम का खराब प्रदर्शन कहीं न कहीं सवाल के घेरे में इन्हें खड़ा करता है।
’प्रदीप कुमार तिवारी, ग्रेटर नोएडा

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 बिखरते परिवार
2 उपयोगिता के पैमाने
3 जीएसटी से उम्मीद
CAA LIVE Updates
X
Testing git commit