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भरोसे की डोर

मोदी सरकार तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में नौ सौ प्रमुख स्थानों पर बड़े-बड़े आयोजन करने की तैयारी में है।
Author May 17, 2017 06:12 am
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Image Source: PTI)

मोदी सरकार तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में नौ सौ प्रमुख स्थानों पर बड़े-बड़े आयोजन करने की तैयारी में है। ‘अच्छे दिन’ के वादे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ हुई एनडीए सरकार ने कई क्षेत्रों में सराहनीय कदम उठाए हैं जैसे मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा, विदेश, सामाजिक सुरक्षा, काला धन, डिजिटलीकरण और जनता के साथ संवाद आदि के जरिए जनाकांक्षाओं को पूरा करने का भरोसा पैदा किया है। आज स्वच्छ भारत अभियान जनांदोलन का रूप धारण कर चुका है। इस अभियान के तहत अक्तूबर 2019 तक भारत को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 25 करोड़ बैंक खाते निशुल्क खोले गए ताकि सब परिवारों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच हो, वहीं देश को वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनाने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ तथा वैश्विक कौशल की राजधानी बनाने के लिए ‘स्किल इंडिया’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है। किसानों की स्थिति सुधारने और उनकी आय 2022 तक दोगुनी करने के लिए सरकार ने बैंकों से मिलने वाले कर्ज को आसान बनाया है। इसके अलावा फसल को सही समय पर और वाजिब दामों में बेचने के लिए ई-मंडी जैसा प्लेटफार्म उपलब्ध कराया है। हालांकि खेती की बढ़ती लागत तथा जोतों के घटते आकार के कारण खेती करना किसान घाटे का सौदा मान रहे हैं और तेजी से उनका खेती से मोह भंग हो रहा है।
विदेशी नीति के मोर्चे पर ‘एक्ट ईस्ट नीति’ से ‘वेस्ट लिंक’ तक तथा ‘कनेक्ट मध्य एशिया’ से अफ्रीकी देशों तक संबंधों में प्रगाढ़ता लाने में मोदी सरकार ने सफलता हासिल की है लेकिन पाकिस्तान तथा चीन के साथ संबंधों में कड़वाहट बनी हुई है। भारत का ‘वन बेल्ट वन रोड’ सम्मेलन में भाग नहीं लेना इसकी बानगी है। वहीं आंतरिक सुरक्षा, रोजगार, खाद्य पदार्थों की महंगाई, भ्रष्टाचार तथा गरीबी निवारण के मामले में सरकार ज्यादा असर नहीं छोड़ पाई है।

नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान युवाओं के लिए एक करोड़ रोजगार पैदा करने की बात की थी, पर कुछ लाख रोजगार ही पैदा कर पाए हैं। युवाओं के बारे में प्रधानमंत्री अक्सर बात करते हैं, पर देश में तीस प्रतिशत युवा ऐसे हैं जो न तो रोजगार में हैं, न ही शिक्षा तथा प्रशिक्षण ले रहे हैं। आने वाले समय में निजी क्षेत्र में युवाओं के रोजगार रोबोट छीन सकते हैं, साथ ही दुनिया भर में बढ़ता संरक्षणवाद भी भारत के लिए चिंता पैदा करेगा। भारत में गरीबी तथा बेरोजगारी एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। एक व्यक्ति गरीब है क्योंकि वह बेरोजगार है और वह बेरोजगार है इसलिए गरीब है।जिस उम्मीद और भरोसे के साथ मोदी सरकार को आम जनता ने स्पष्ट बहुमत दिया था, उसकी भरोसे की डोर नहीं टूटे, इसके लिए पिछले तीन साल में शुरू की गई योजनाओं तथा कार्यक्रमों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराना होगा। साथ ही समावेशी विकास और सुशासन की स्थापना के लिए देश को घुन तरह खोखला बना रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ भी एक सर्जिकल स्ट्राइक की जानी चाहिए।
’कैलाश मांजु बिश्नोई, मुखर्जीनगर, दिल्ली

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