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जो वादे किए गए थे उनका क्या हुआ?

नोटबंदी और जीएसटी तो रामबाण बताए जा रहे थे। फिर इनके लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था की सेहत संवरने के बजाय क्यों और बिगड़ती जा रही है।

BHU row, Shiv Sena, PM Narendera Modi, Shiv Sena attacks on PM Narendera Modi, Banaras Hindu University, BHU lathicharge, BHU news, jansattaप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (File Photo)

वादा तेरा वादा
राजग सरकार को साढ़े तीन साल हो रहे हैं। अब वह केवल कांग्रेस की खामियां और नाकामियां गिना कर अपनी पीठ नहीं थपथपा सकती। उसे बताना चाहिए कि उसने साढ़े तीन साल में क्या किया है। अर्थव्यवस्था की हालत दिनोंदिन और शोचनीय होती जा रही है। नोटबंदी और जीएसटी तो रामबाण बताए जा रहे थे। फिर इनके लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था की सेहत संवरने के बजाय क्यों और बिगड़ती जा रही है। फिर, इससे भी अहम मुद््दा यह है कि जो वादे किए गए थे उनका क्या हुआ?

प्रधानमंत्री ने हर साल दो करोड़ नए रोजगार का वादा किया था। इस हिसाब से अब तक छह करोड़ से ज्यादा नए रोजगार सृजित होने चाहिए थे। पर वह होना तो दूर, उलटे लाखों लोगों की नौकरियां चली गर्इं और करोड़ों छोटे-मझोले व्यापारियों का धंधा महीनों से चौपट है। किसानों की और बुरी हालत है। प्रधानमंत्री ने किसानों से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और उपज का लागत से डेढ़ गुना दाम दिलाने का वादा किया था। पर इस दिशा में कुछ नहीं किया गया। इससे नाराज किसान जगह-जगह आंदोलन की राह पकड़ रहे हैं। क्या यही अच्छे दिन हैं!
सुधीर कुमार मिश्र, विवेक विहार, दिल्ली

खतरनाक खेल
ब्लू व्हेल गेम ने नए साइबर खतरों की ओर इशारा किया है। जहां पहले साइबर अपराध में व्यक्तिगत जानकारियों और धन पर हमला किया जाता था वहीं इस तरह के खतरनाक खेलों ने सीधे जिंदगी पर हमला बोला है। इंटरनेट की आभासी दुनिया ने व्यक्ति के सामान्य तौर-तरीकों को भी आभासी होने के भ्रम में डाल दिया है। मोबाइल फोन को घंटों हाथ में लिये रहने की लत भी नई-नई चीजों को जानने के लिए उकसाती है। इंटरनेट के समुद्र्र में छलांग लगा कर खुद को बचा पाना असंभव-सा है।

कोल्ड ड्रिंक्स के प्रचार में दिखाए गए ‘खतरों के खिलाड़ी’ के खतरनाक प्रसंगों जैसे बेवजह के कामों की ओर लोगों की रुचि होना सोचने का विषय है क्योंकि ये भी अकाल मौत से पहले की अवस्थाएं हैं। इन्हें हमारे परिवार के बढ़े-बूढ़े भी बड़े चाव से देखते हैं। इसलिए बच्चों का ब्लू ह्वेल गेम की ओर आकर्षित होना चौंकाने जैसा नहीं है। आने वाले समय में इंटरनेट की इस आभासी दुनिया से बच के रहना असंभव है। भविष्य में सारे काम मशीनों से या कृत्रिम बुद्धि से होने वाले हैं। इसलिए सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की है कि ऐसी शिक्षा दी जाए जो मानसिक मजबूती की नींव पर टिकी हो।
चंद्रकांत, एएमयू, अलीगढ़

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