JANSATTA CHAUPAL ABOUT THINKING ABOUT WOMEN EMPOWERMENT - Jansatta
ताज़ा खबर
 

बदलाव की राह

समाज में महिलाओं के लिए लोगों की सोच में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। अब महिलाएं अपने पैरों पर खड़ा होना जानने लगी हैं।

Author July 26, 2017 5:49 AM
प्रतीकात्मक चित्र।

बदलाव की राह

समाज में महिलाओं के लिए लोगों की सोच में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है। अब महिलाएं अपने पैरों पर खड़ा होना जानने लगी हैं। वे जानती हैं कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं करना है। उन्हें क्या चाहिए और क्या नहीं चाहिए, उनके लिए क्या सही है और क्या गलत है। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे निकल रही हैं। ऐसी बातें सुन कर महिलाओं को अच्छा लगता है। लेकिन यही बात जब कोई रूढ़िवादी पुरुष पीछे खड़ा सुन रहा होता है तो मानो उसके शरीर में सुईयां चुभ जाती हैं। इसके बावजूद यह सवाल बना रहता है कि क्या वाकई महिला सशक्तीकरण हो रहा है! विद्वानों की मानें तो महिला सशक्तीकरण का मतलब किसी महिला की उस क्षमता से है जिससे उसमें यह योग्यता आ जाती है कि वह अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय खुद ले सके और वह परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णयों की निर्माता खुद हो। निजी स्वतंत्रता और खुद के फैसले लेने के लिए महिलाओं का अधिकार हासिल करना ही महिला सशक्तीकरण है।

इसके बरक्स कई तस्वीरें हमारे सामने घूम जाती हैं। मसलन हाल ही में सनी लियोनी ने जब एक बच्ची को गोद लिया और सोशल मीडिया पर फोट पोस्ट किया तो कुछ लोगों ने सनी और डेनियल की बेटी के रंग पर तंज कसा तो कुछ लोगों ने सनी लियोन के अतीत को याद करते हुए पूछा था कि सरकार ने कैसे एक पोर्न स्टार को गोद लेने का अधिकार दे दिया… सनी ने गोद क्यों लिया… क्या सनी खुद बच्चे को जन्म नहीं दे सकती! यानी सनी को परेशान करने का सिलसिला चल पड़ा। अपनी जिंदगी के बारे में स्वतंत्र रूप से फैसला लेने वाली एक महिला के साथ आखिर ऐसा क्यों हुआ? समाज को इस सवाल से जूझना होगा।

समाज में लोगों की सोच में बदलाव हो रहा है, लेकिन क्या पूरे समाज की सोच बदल रही है? आज भी ज्यादातर लोग रूढ़िवादी सोच को तवज्जो देते हैं। उन्हें किसी महिला को अक्सर ऐसा कहते सुना जाता है कि तुम क्या करोगी पैसा कमा कर… तेरा पति तो अच्छा पैसा कमाता है! शर्ट-पैंट तो लड़कों का पहनावा होता है, तुम्हारे लिए यह सब नहीं है… लड़कियों को सूट-सलवार ही पहनना चाहिए… तुम कहां बाहर जाओगी, यह काम तेरा भाई कर देगा…! यानी लड़की को रोकने के लिए कई बेमानी कारण देकर लड़कियों को घर की दहलीज के भीतर ही रोक लिया जाता है।अगर सच में महिलाओं के बीच सशक्तीकरण लाना है तो सबसे पहले रूढ़िवादी सोच को समाज से दूर लेकर जाना होगा। जब तक सोच के स्तर पर पूर्वग्रह से मुक्त बराबरी नहीं आएगी, तब तक वास्तविक बदलाव संभव नहीं है।
’संजना, शाहदरा, दिल्ली

जोखिम की रपट
हाल ही नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा ऐसी रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई, जिसमें बताया गया था कि देश के पास केवल दस दिन तक ही युद्ध करने लायक असलहा है। अगर इसमें जरा भी सच्चाई है तो ऐसी संवेदनशील जानकारी का इस तरह सार्वजनिक किया जाना कहां तक उचित है! कैग जैसी संवैधानिक संस्था अपनी निष्पक्षता तथा पारदर्शिता के लिए जाती है। उससे इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जा सकती। देश की सुरक्षा की कीमत पर किसी भी प्रकार की पारदर्शिता स्वीकार नहीं की जा सकती। सरकार को शीघ्र ही इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।
’ऋषभ देव पांडेय, कोरबा, छत्तीसगढ़

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App