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चौपाल: ऐसे शिक्षक

मानव समाज की मुक्ति के लिए निरंतर संघर्ष में अज्ञान से मुक्ति के संघर्ष की भूमिका मुख्य है
Author नई दिल्ली | September 7, 2016 05:48 am
प्रतिकात्मक तस्वीर।

मानव समाज की मुक्ति के लिए निरंतर संघर्ष में अज्ञान से मुक्ति के संघर्ष की भूमिका मुख्य है। शैक्षणिक संस्थान और हो चुकी और होने वाली प्रगति में अहम है। इतिहास में जब कभी व्यवस्था चरमराई है, शिक्षक मौके पर उठ खड़े हुए। एथेंस का जनतंत्र जब अधोगति को प्राप्त हुआ तो सुकरात, प्लेटो और अरस्तु, जो सभी शिक्षक थे, आगे बढ़े। भारत में चाणक्य, जो एक शिक्षक ही थे, नंदवंश के कुशासन के खिलाफ अग्रसर हुए और उसका सामना किया। आज के दौर में शिक्षक का समर्पण और सरोकार बदल गया है। वह चाहता है कि पढ़ने-पढ़ाने के मामले में उसे मटरगश्ती की पूरी छूट दी जाए, वेतन-भत्ते और अन्य सुविधाएं उन नौकरशाहों के बराबर दी जाएं जो सरकार के चौबीस घंटे के नौकर माने जाते हैं और मान-सम्मान सबसे ज्यादा दिया जाए। यह कैसे संभव है?

अब शिक्षक दिवस मनाने के बाद शिक्षकों को सोचना होगा कि अगर उन्हें अपने कर्तव्यबोध (जिसमें सामाजिक नेतृत्व देना शामिल है )की कोई परवाह नहीं होगी तो उनके अधिकारबोध की परवाह कौन करेगा! हर स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मद्देनजर शिक्षक का योग्य होना सबसे अनिवार्य शर्त है। इसके लिए एक अकादमिक परिषद की स्थापना की जाए। इस परिषद में अपना नाम पंजीकृत कराए बगैर कोई भी शिक्षा को पेशे के रूप में न अपनाए। सभी शिक्षकों का पंजीकरण आयोग के जरिए हो, जिसकी बहाली भारत की अकादमिक परिषद करे। शिक्षकों की अनौपचारिक बहालियां न हों, आपात-व्यवस्था में भी नहीं।
’रोहित रमण, पटना विश्वविद्यालय

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