चौपाल: जुर्म और सजा, नहीं सुधरे हालात - Jansatta
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चौपाल: जुर्म और सजा, नहीं सुधरे हालात

जयललिता के निधन के बाद हुए इस समस्त घटनाक्रम ने साफ जाहिर कर दिया कि राजनीति में जनहित तो केवल नाम मात्र है, बाकी स्वहित और कुर्सी पाने की अंधी होड़ में नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं।

Author February 20, 2017 3:45 AM
शशिकला के साथ ओ. पन्नीरसेल्वम। (File Photo)

जुर्म और सजा

जयललिता के निधन के वक्त शशिकला को अत्यंत भावुक और बेहद शोक-विह्वल देख कर किसी ने कल्पना भी न की होगी कि उन्हें जल्द ही देश की शीर्ष अदालत चार साल की सजा सुनाने के साथ ही उन पर दस करोड़ का जुर्माना लगा देगी। जयललिता के निधन के बाद हुए इस समस्त घटनाक्रम ने साफ जाहिर कर दिया कि राजनीति में जनहित तो केवल नाम मात्र है, बाकी स्वहित और कुर्सी पाने की अंधी होड़ में नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं।  खैर, शशिकला अपने कर्मों का बुरा फल भुगत रही हैं। इस फैसले के बाद जनता के मन में न्यायतंत्र के प्रति विश्वास और पुख्ता हुआ है। लेकिन आय से अधिक संपत्ति की मुख्य अदाकारा जयललिता हमारे न्यायतंत्र की कछुआ चाल के कारण बच निकलीं। जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वाले तथाकथित जनसेवकों का आजीवन चुनाव लड़ना प्रतिबंधित कर देना चाहिए। राजनीति में दिनोंदिन बढ़ते भ्रष्टाचार ने जनता के मन में लोकतंत्र और राजनेताओं के प्रति विश्वास खंडित किया है। कुछेक अपवादों के कारण पूरे तंत्र को दोषी माना जाने लगा है। आजादी के बाद देश में बेईमान और भ्रष्ट नेताओं की एक बड़ी फौज खड़ी होती गई। राजनीतिक दल दागियों को टिकट देना तुरंत बंद करें और जनता भी दल को न देख कर व्यक्ति की छवि को देख कर वोट देना शुरू करे, ताकि जनप्रतिनिधि भले ही विकास करें या न करें, पर विनाश करने की तो कदापि न सोचें। सिर्फ एक शशिकला के गिरफ्तार होने से देश में रामराज्य नहीं आ जाएगा। ऐसी कितनी ही हस्तियां हैं जो नियम-कानूनों को ताक पर रख आपराधिक हथकंडों से जनता का धन लूटे जा रही हैं। आखिर उन सबका क्या?
’देवेंद्रराज सुथार, बागरा, जालोर

नहीं सुधरे हालात

दिल्ली पुलिस ने पिछले साल के बलात्कार संबंधी जो आंकड़े पेश किए हैं वे महज दिल्लीवासियों को नहीं, बल्कि सभी देशवासियों को निराश करने वाले हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक पिछले साल राजधानी में बलात्कार के 2,155 और छेड़खानी के 4,165 मामले दर्ज किए गए। इनसे एक सीधा-सा आंकड़ा यह भी निकलता है कि पिछले साल दिल्ली में हर एक घंटे किसी न किसी महिला के साथ आपराधिक घटना हुई। साथ ही साथ हर चार घंटे में एक बलात्कार हुआ। ये आंकड़े निश्चित तौर पर सभी देशवासियों को शर्मसार करने वाले हैं। सीधी-सी बात है कि पिछले कुछ सालों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर किए गए तमाम प्रयासों के बावजूद कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं दिख रहा है। ऐसे में देश के अन्य शहरों का क्या हाल होगा, इसकी कल्पना भी झकझोर देती है।
’नितीश कुमार, आईआईएमसी, दिल्ली

जयललिता का इलाज करने वाले डॉक्टर का बयान- “आर्गन फेल होने से हुई थी मौत”

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