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झुग्गियों की राजनीति

दिल्ली में नगर निगम चुनावों के करीब आते ही सभी राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने दांव खेलने शुरू कर दिए हैं।

Author January 3, 2017 1:03 AM
झुग्गी-बस्तियों।

दिल्ली में नगर निगम चुनावों के करीब आते ही सभी राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने दांव खेलने शुरू कर दिए हैं। सभी दलों की आंखें झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले लाखों मतदाताओं पर टिकी हैं। भाजपा द्वारा मनोज तिवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना भी इन बस्तियों में रहने वाले पूर्वांचली मतदाताओं को लुभाने की एक कोशिश है।

पर विडंबना है कि नोटबंदी के चलते इन बस्तियों में रहने वाले अधिकतर मजदूर दिल्ली छोड़ चुके हैं और जो बचे हैं उन्हें भी अब अपना परिवार पालना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में नेताओं द्वारा उन्हें ‘पेटीएम’ का प्रयोग सिखाया जाना जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहा है।एक तरफ तो भाजपा शाषित निगम झुग्गी-बस्तियों पर बुलडोजर चला रहा है वहीं दूसरी ओर इनके नेता झुग्गी-बस्तियों में रात-गुजारने का आडंबर कर रहे हैं। स्वार्थ की इस राजनीति को अब जनता भी समझ रही है। पिछले चुनावों में झुग्गी-बस्ती के निवासियों का मत अरविंद केजरीवाल को मिला था जिसमें सेंध लगाने का प्रयास भाजपा और कांग्रेस कर रही हैं।

दिल्ली की लगभग सात सौ झुग्गी-बस्तियों में रह रहे लाखों लोग आज भी केजरीवाल को नायक मानते हैं। विपक्षी दल भी इस सच्चाई को भांप अपने सभी पैंतरे आजमा रहे हैं ताकि चुनावों में इस वोटबैंक का ध्रुवीकरण किया जा सके। यही मतदाता अगले निगम चुनावों में दिल्ली की राजनीति तय करेंगे।
’अश्वनी राघव, उत्तम नगर, नई दिल्ली

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