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भ्रष्टाचार पर वार

सऊदी अरब में भ्रष्टाचार के आरोप में खरबपति प्रिंस अल वालीद बिन तलाल समेत ग्यारह राजकुमारों और दर्जनों मौजूदा एवं पूर्व मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया है।

Author November 7, 2017 4:32 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

भ्रष्टाचार पर वार
सऊदी अरब में भ्रष्टाचार के आरोप में खरबपति प्रिंस अल वालीद बिन तलाल समेत ग्यारह राजकुमारों और दर्जनों मौजूदा एवं पूर्व मंत्रियों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाते समय सामने कौन है यह देखा जाना जरूरी नहीं है, बल्कि उसे उसके गुनाह के अनुसार सजा दिलाने के लिए सलाखों के पीछे डालना जरूरी है। जिसने भ्रष्टाचार किया है उसे पकड़ लिया जाएगा ऐसा संदेश इस कार्रवाई से जनता में गया है। जब बड़े और ताकतवर व्यक्तियों पर कार्रवाई हो सकती है तो गुनाह करने वाले हर व्यक्ति पर कार्रवाई हो सकती है, ऐसे साफ संकेत मिलने से कोई भी गलत काम करने से पूर्व सोचेगा जरूर। भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ना है तो किस तरह प्रहार करना जरूरी है इसकी एक मिसाल दुनिया के सामने रखी गई है।
भारत की प्रगति में भ्रष्टाचार एक बड़ी बाधा बन कर खड़ा है। उससे निपटने के लिए हमें भी सऊदी अरब जैसे कदम उठाने चाहिए।
’मनीषा चंदराणा, मुंबई
वैकल्पिक र्इंधन
दिल्ली में तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदूषण के स्तर में सुधार नहीं हो रहा है। वहां की हवा स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक सिद्ध हो रही है। ऐसे समय में दिल्ली सरकार का ढाबों और रेस्तरां में लकड़ी और कोयले के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय सराहनीय है। लकड़ी और कोयले से निकलने वाला धुआं सिगरेट के धुएं से भी अधिक हानिकारक होता है। इससे कई जानलेवा बीमारियां हो जाती हैं। दो तिहाई से ज्यादा भारतीय परिवार खाना पकाने के लिए अब भी लकड़ियों और उपलों का इस्तेमाल करते हैं जिनसे घरों के भीतर जबरदस्त वायु प्रदूषण होता है। नतीजतन, हर साल लाखों लोग मौत के मुंह में समा जाते हैं
इससे मुक्ति पाने के लिए केंद्र सरकार की गरीब परिवारों के लिए उज्ज्वला योजना उपयोगी साबित होगी जिसके तहत उन्हें सस्ती दर पर गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे न केवल प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी बल्कि स्वास्थ्य स्तर में भी सुधार होगा। ऐसी ही योजना केंद्र सरकार को सभी रेस्तरां और ढाबों के लिए चलानी चाहिए। जब तक विकल्प नहीं उपलब्ध होगा तब तक इस ठोस र्इंधन का इस्तेमाल बंद होना मुश्किल है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण को भी इस दशा में उचित दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
’गीता आर्य, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश

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