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आस्था का जोखिम

केरल के सबरीमाला मंदिर में मचे भगदड़ के बाद घायल हुए चालीस लोगों में कुछ की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।

Author December 28, 2016 02:11 am
केरल का सबरीमाला मंदिर (PTI Photo)

केरल के सबरीमाला मंदिर में मचे भगदड़ के बाद घायल हुए चालीस लोगों में कुछ की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। संभव है कि यह भगदड़ एक बार फिर से कुछ जिंदगियां ले ले। इस घटना के बाद उसी केरल के पुत्तिंगल मंदिर का हादसा याद आया, जिसमें कितने ही लोग अकाल मौत मरे थे। पांच साल पीछे जाएं तो साल की पहली ही तारीख को केरल के उसी सबरीमाला मंदिर में सैकड़ों जानें गई थीं।

कुल मिला कर कहें तो पिछले पांच वर्षों में केरल की सरकार ने ऐसे हादसों से कुछ नहीं सीखा है। आस्था की अंधी दौड़ में मरते लोग क्या उसी केरल के हैं जहां संसार की पहली निर्वाचित वामपंथी सरकार बनी थी? क्या ये वही केरल है जो अपनी साक्षरता और प्रगतिशीलता के लिए देश भर में जाना जाता रहा है? कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रभुत्व वाले केरल मॉडल में कहां छेद रह गया जो वहां भी धार्मिक आयोजनों में पहले हुई मौतों को नजरअंदाज कर लोग फिर से लाइन में लग जाते हैं?अगर केरल हिंदुस्तान के बाकी राज्यों से अलग नहीं है, तब क्यों वहां लंबे समय राज करने वाले वीएस अच्युतानंदन को फिदेल कास्त्रो का दर्जा दिया गया? समाज अपने भविष्य में किस रूप में विकसित होगा, यह सत्ता की सक्रियता पर भी
निर्भर करता है।
’अंकित दूबे, जेएनयू, दिल्ली

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