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चौपाल- असुविधा की सड़क

सरकारी आयोजनों और वीआइपी संस्कृति के नाम पर होने वाले अघोषित चक्का जाम की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है।

Author October 11, 2017 5:34 AM
सांकेतिक तस्वीर

असुविधा की सड़क
राज्यस्तरीय और राष्ट्रीय राजमार्गों को देश की जीवन रेखा की तरह देखा जाता है। इन्हीं से होकर हर रोज लाखों टन जीवनोपयोगी वस्तुएं एक स्थान से दूसरे स्थान पर तय समय पर पहुंच पाती हैं। इसी व्यवस्था को मजबूत बनाने और बनाए रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश जारी किए थे कि किसी भी परिस्थिति में इन मार्गों को लोगों द्वारा विभिन्न धरना-प्रदर्शन या आयोजनों के नाम पर अवरुद्ध न होने दिया जाए। इसके अलावा, ऐसा करने वाले लोगों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए जेल भेजा जाए।

इन निर्देशों के प्रभाव से अब सड़कों पर चक्का जाम करने की घटनाएं जरूर कम हुई हैं। लेकिन सरकारी आयोजनों और वीआइपी संस्कृति के नाम पर होने वाले अघोषित चक्का जाम की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है। किसी कथित वीआइपी के आगमन पर देर तक यातायात को रोके रखने के मामले तो आम हैं। इसके साथ ही किसी राज्य या राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे हो रहे बड़े सरकारी आयोजन के कारण बड़े-बड़े मालवाहक वाहनों को घंटों रोके रखे जाने की भी घटनाएं देखने मिल जाती हैं। इससे वैसे ट्रकों की मीलों लंबी कतारें लग जाती हैं, जिन पर लदे खाद्य सामग्री खराब होने योग्य होते हैं।
जाहिर है, सरकारी आयोजनों और वीआइपी लोगों के आवागमन की ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिसमें किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित हो सके।
’ऋषभ देव पांडेय, जशपुर, छत्तीसगढ़

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पर्व की रोशनी
भारत एक विशाल देश है जहां विभिन्न धर्मों और संप्रदायों को मानने वाले लोग रहते हैं। इसलिए यहां मनाए जाने वाले त्योहार और पर्व भी अनेक हैं। ये त्योहार एक ओर हमारे जीवन में आनंद, उमंग और उत्साह का संचार करते हैं, वहीं हमारी अद्भुत, अनमोल और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करते हैं। यों हरेक त्योहार का अपना एक विशेष महत्त्व होता है, लेकिन इन सब में दीपावली की पहचान खास है। यह हमें समाज में फैली अनेक बुराइयों के अंधकार को समाप्त कर अच्छाइयों के प्रकाश की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करता है। छोटे-बड़े, धनी-निर्धन सभी इस पर्व को पूरे उत्साह से मनाते हैं।

इस दिन हमें यह निश्चय करना चाहिए कि हम केवल बाहर के प्रकाश पर ही ध्यान न दें, बल्कि अपने दिलों में भी सद्गुणों को आलोकित करें और यह प्रयास करें कि इस संसार में जहां कहीं भी गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा और बुराइयों का अंधेरा है, वह दूर हो। हमें ये पंक्तियां सदा याद रखनी चाहिए- ‘दीये जलाओ, पर रहे ध्यान इतना, अंधेरा धरा पर कहीं रह न पाए।’ दीपावली का प्रकाशोत्सव हमें सद्भावना, सदाचार और मेल-मिलाप का संदेश देता है। इसे पूर्ण निष्ठा, पवित्रता और उचित ढंग से मनाया जाना चाहिए ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

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