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पारदर्शिता जरूरी

आम जनता के बीच राजनीति की विश्वसनीयता बहाल करने का एक सहज उपाय है।

Author December 6, 2016 4:27 AM
भाजपा और कांग्रेस

राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता, आम जनता के बीच राजनीति की विश्वसनीयता बहाल करने का एक सहज उपाय है। आज राजनीतिक दलों को बीस हजार रुपए से कम के किसी भी चंदे का कोई ब्योरा नहीं देना पड़ता। इसमें बदलाव लाना होगा। चुनाव में राज्य के निवेश पर भी चर्चा की जा सकती है, बशर्ते उसका दुरुपयोग न हो। निर्वाचन आयोग को सशक्त बनाना होगा क्योंकि यदि राजनीतिक चंदे के दुरुपयोग अथवा उसमें अनधिकृत धन की आशंका हो भी, तब भी निर्वाचन आयोग कोई बड़ा कदम नहीं उठा सकता। कार्रवाई में देरी भी एक प्रमुख वजह है। राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार के कानून के तहत लाना जरूरी है। राजनीतिक चंदे के रूप में धन ही नहीं, संपत्ति, सहयोग, विपक्षी दलों के कार्य में बाधा, छुपा-मकसद, तोहफे आदि भी शामिल हैं, लिहाजा, इन पर भी ध्यान देना होगा। स्थानीय स्तर पर दबाव के जरिए भी चंदा इकट्ठा किया जाता है। इस सबके साथ जब तक भ्रष्टाचार और लालफीताशाही होगी, चुनावी चंदे में पूर्ण पारदर्शिता लाना एक मुश्किल कार्य होगा।
’वीरेश्वर तोमर, हरिद्वार

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