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विकास के पैमाने

हाल में ही आइसलैंड में महिलाओं को समान काम के लिए पुरुषों के बराबर वेतन पाने का कानूनी अधिकार दिया गया है।

Author June 21, 2017 5:12 AM
सांकेतिक फोटो

विकास के पैमाने
हाल में ही आइसलैंड में महिलाओं को समान काम के लिए पुरुषों के बराबर वेतन पाने का कानूनी अधिकार दिया गया है। वह विश्व का पहला देश है जिसने निजी और सरकारी क्षेत्र में महिलाओ को सही मायने में लैंगिक समता के लिए कानून बनाया है। अगर कोई इसे नही मानता है तो उस पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। समकालीन समय का बेहतरीन थिंक टैंक विश्व आर्थिक मंच ने ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में आइसलैंड को 2015 में पहला स्थान दिया था। भारत को इस इंडेक्स में काफी निम्न स्थान प्राप्त था।

दरअसल, भारत में समान कार्य के समान वेतन के लिए नीति निर्देशक तत्त्व में प्रावधान किया गया है। इसके चलते यह राज्य के लिए बाध्यकारी नहीं है। यही वजह है कि भारत में निजी क्षेत्र में महिलओं को पुरुषो के मुकाबले निम्न वेतनमान दिया जाता है। इसके चलते भारत में लैंगिक समता एक स्वप्न मात्र है। भारत को आइसलैंड से सीख लेते हुए इस तरह के नूतन विचार को अपनाना चाहिए। इससे न केवल लैंगिक समता आएगी, साथ ही आर्थिक विकास दर में भी काफी तेजी आएगी।
’आशीष कुमार, उन्नाव, उत्तर प्रदेश
बाजार में क्रिकेट
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले को दर्शक खेल कम और युद्ध का मैदान ज्यादा समझते है और शायद इसी का परिणाम है कि सोशल मीडिया पर जिन लोगों ने कुछ दिन पहले खिलाड़ियों को ‘बाहुबली’ की संज्ञा दी, उन्हीं लोगो ने मैच के बाद उन्हें जम कर कोसा। आज खेल का महत्त्व लगभग खत्म-सा हो गया है, क्योकि उसका रूप आज बाजारीकरण में परिवर्तित हो चुका है।

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टीआरपी के रेस में मीडिया भी अपने विवेक को ताक पर रख कर काम करती है। क्रिकेट का प्रसारण टीवी पर ऐसे किया जाता है, मानो हम जंग लड़ने जा रहे हैं। लोगों की मानसिकता को बदलने का भरसक प्रयास हमारा मीडिया कर रहा है। एक तरफ हमारी हॉकी टीम जीतती है तो उसे पूछने वाला कोई नहीं, और दूसरी और क्रिकेट का महिमामंडन किया जाता है। यही वजह है कि आज हमारा राष्ट्रीय खेल हॉकी लोगों की आंखों से ओझल होता जा रहा है?
’रोहित कुमार पाठक, सीतामढ़ी, बिहार

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