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चौपाल: बड़बोलापन सही नहीं

भूल से भी प्रमादवश बड़बोलेपन को अपने पास फटकने न दें। काल महाबली है। हम सभी उसके अधीन हैं।

Author November 21, 2017 2:29 AM
रानी पद्मावती के रोल में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण

भारी चूक

शैक्षिक संस्थानों समेत केंद्र और राज्य सरकार के विभागों की दौ सौ से अधिक वेबसाइटों पर आधार से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक कर देना भारी चूक कही जाएगी। क्योंकि सरकार यह वादा कर चुकी है कि आधार से जुड़ी हर जानकारी गुप्त रखी जाएगी। साइबर क्राइम करने वाले इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें बिना किसी मेहनत के लोगों की निजी जानकारी मिल रही है तो उसका दुरुपयोग रोकना कठिन होगा। व्यक्ति की निजता के अधिकार को सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकार का दर्जा दे चुका है। किसी भी व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी किसी को देनी है या नहीं, यह पूरी तरह से उस व्यक्ति पर निर्भर करता है। उसके लिए उस पर कोई जबरदस्ती नहीं की जा सकती। देश का सर्वोच्च न्यायालय निजी जानकारी के बारे में बहुत ही सचेत है लेकिन आधार से जुड़ी जानकारियां जिस तरह सार्वजनिक की गई हैं, उसकी विधिवत जांच होनी चाहिए। बेहतर यही है कि किसी अवकाशप्राप्त न्यायाधीश की देखरेख में यह जांच हो।
’मनीषा चंदराणा, मुंबई
बड़बोलापन सही नहीं
जनता में बढ़ते हुए भारी रोष को देखते हुए ‘पद्मावती’ फिल्म के निर्माताओं ने स्वयमेव इस फिल्म की रिलीज की तारीख को अग्रिम सूचना तक आगे खिसका दिया है। इस बीच हो सकता है कि फिल्म के कुछ हिस्सों की संवीक्षा की जाए और सेंसर बोर्ड कुछ अपनी राय भी दे। ऐसे में फिल्म की नायिका दीपिका पादुकोण का वह बयान याद आना स्वाभाविक है, जिसमें उसने डंके की चोट पर कहा था कि फिल्म रिलीज होकर रहेगी। दीपिका ने कहा था, ‘मेरी फिल्म एक दिसंबर को रिलीज होकर रहेगी और इस पर किसी प्रकार की रोक न लगाई जा सकती है और न ही कोई रोक लगा सकता है।’ ज्ञानी लोग सही कह गए हैं कि भूल से भी प्रमादवश बड़बोलेपन को अपने पास फटकने न दें। काल महाबली है। हम सभी उसके अधीन हैं। वर्ना अपनी ही किरकिरी होती है। विनम्रता दिल जीतती है जबकि अहंकार दिल दुखाता है।
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर।

व्यर्थ का विरोध

पिछले कई दिनों से फिल्म पद्मावती को लेकर बहस छिड़ी हुई है! फिल्म में क्या कुछ ऐसा है जिसे लेकर विरोध हो रहा है, यह कोई नहीं जानता! विरोध करने वालों को भी नहीं पता कि विरोध कर किसलिए रहें हैं। फिल्म में ऐसा कौन सा दृश्य है, क्योंकि फिल्म तो अभी आई ही नहीं है! लेकिन बस विरोध किए जा रहे हैं। मतलब वे विरोध नहीं एक तरह से फिल्म की पब्लिसिटी कर रहे हैं। अगर फिल्म में कुछ गलत है तो सेंसर बोर्ड को देखने दिया जाना चाहिए न कि खुद किसी को कानून हाथ में लेने का अधिकार है। कोई और कौन होता है फैसला करने वाला। चार लोगों को बैठा कर फिल्म दिखाने से भी कुछ नहीं होने वाला है! केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का यह काम है और वहीं से समाधान निकलना चाहिए। इस फिल्म की पब्लिसिटी इतनी हो चुकी है कि हर कोई अब इसे देखना चाहेगा। विरोध करने वालों ने मुफ्त की पब्लिसिटी करने में इतनी मेहनत जो की है।
’कनिका कृष्ण, आइआइएमसी, दिल्ली

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