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अदृश्य चश्मे

आजकल कुछ आॅनलाइन कंपनिया नजर को ठीक करने के मुफ्त में चश्मे का टेस्ट उपलब्ध करा रही हैं तो वहीं कुछ बेनाम कंपनियां लोगों को अदृश्य चश्मे भी पहना रही है।
Author December 27, 2016 02:39 am
प्रतिकात्मक तस्वीर।

आज के खान-पान और प्रदूषित वातावरण के कारण लोगों की आंखों से संबंधित समस्या बढ़ती जा रही है, जिससे उनकी नजरों पर तो फर्क पड़ा ही है, साथ ही साथ उनका नजरिया भी प्रभावित हुआ है। आजकल कुछ आॅनलाइन कंपनिया नजर को ठीक करने के मुफ्त में चश्मे का टेस्ट उपलब्ध करा रही हैं तो वहीं कुछ बेनाम कंपनियां लोगों को अदृश्य चश्मे भी पहना रही है। आज अधिकतर लोगों की आंखों पर एक अदृश्य चश्मा लगा हुआ है। इसकी खासियत यह है कि जिसकी आंखों पर यह चश्मा लगा होता है उसे भी इस बात का अहसास नहीं होता कि उसने एक खास प्रकार का अदृश्य चश्मा पहन रखा है। इस चश्मे के कारण व्यक्ति को दुनिया उसी रंग में रंगी दिखाई देती है जिस रंग का वह चश्मा है। चूंकि चश्मा अदृश्य है, इसलिए चश्मे के बजाय केवल उसका प्रभाव दिखता है। इसका प्रभाव लोगों की आंखों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि उनका पूरा व्यवहार और नजरिया भी परवर्तित हो जाता है। इस चश्मे के कारण उन्हें एक ही तरह की बातें समझ में आती हैं और वे एक ही तरह की बातों को सुनना पसंद करते हैं। अगर कोई व्यक्ति उन लोगों के सामने चश्मे के रंग से अलग कोई बात रखता है तो इन अदृश्य चश्मे पहने हुए लोगों को वह व्यक्ति दूसरे ग्रह का प्राणी लगने लगता है।

इस चश्मे की एक खासियत यह भी है कि यह व्यक्ति को एक काल्पनिक दुनिया में पहुंचा देता है जहां सत्य और तथ्य को कोई भी महत्त्व नहीं दिया जाता। व्यक्ति को यह काल्पनिक दुनिया ही वास्तविकता लगने लगती है और वह दोनों (सत्य और कल्पना) में अंतर करना भूल जाता है। इस अदृश्य चश्मे का प्रभाव इतना अधिक होता है कि अगर पहनने वाले को कोई यह अहसास कराए कि उसकी आंखों पर कोई चश्मा है तो वह इसे उतारने से भी कतराता है और वास्तविकता के बजाय कल्पना में ही रहना पसंद करता है। आज जरूरत इस बात की है कि हम अपनी और लोगों की नजरों से इस अदृश्य चश्मे को हटाएं और वास्तविकता में जीने का प्रयास करें।
’विक्रम प्रताप सिंह, नोएडा

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