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बुलेट ट्रेन किसके लिए

रेलमंत्री ने कहा है कि ट्रेनों के प्रत्येक डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे जिससे ट्रेनों में सफर करने वाली सभी महिलाएं व पुरुष अपने आप को सुरक्षित महसूस करेंगे।

Author Published on: October 2, 2017 6:29 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (PTI)

मौत का पुल
सब ने ‘मौत का कुआं’ तो सुना है, पर मौत का पुल भी है। मुंबई के परेल और एलफिंस्टन रेलवे स्टेशनों के बीच बने फुटओवर ब्रिज पर भगदड़ मचने के कारण 22 लोग अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठे। गौरतलब है कि शिव सेना के एक सांसद ने ब्रिज को चौड़ा करने के लिए चिट्ठी लिखी थी, पर जवाब में तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने फंड न होने की दलील देकर कुछ नहीं किया। जिस देश में एक फुटओवर ब्रिज सही नहीं कराया जा सका, उस देश में बुलेट ट्रेन लाई जा रही है! जब पैसा नहीं है तो बुलेट ट्रेन क्यों?
’किरण मौर्य, दिल्ली
समय की मांग
भारत विशाल देश है। यहां की आबादी के हिसाब से बुलेट ट्रेन का होना आवश्यक है। बुलेट ट्रेन व्यावसायिक दृष्टि से भी उपयोगी सिद्ध होगी। गरीब देश कह कर भारत के विकास को रोका नहीं जा सकता। बुलेट ट्रेन का किराया हवाई किराये से अधिक रखना होगा, क्योंकि इस रूट पर केवल पांच प्रतिशत लोग बुलेट ट्रेन में सफर करेंगे। यह परियोजना देश के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान करेगी, लेकिन उसके दूसरे पहलू पर भी विचार करना होगा। भारतीय रेल का कुल बजट 121 हजार करोड़ रुपया है जबकि उसकी तुलना में बुलेट ट्रेन परियोजना पर एक लाख दस हजार करोड़ रुपए का खर्च होगा। इससे मालूम होता है कई बुलेट ट्रेन आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है, फिर भी देश की उन्नति इसके साथ जुड़ी हुई है। बुलेट ट्रेन भारत की आर्थिक और औद्योगिक ताकत को बढ़ाने का काम करेगी।
’कांतिलाल मांडोत, सूरत

बुलेट ट्रेन किसके लिए
विश्व में सबसे बड़ा रेल नेटवर्क भारत का है। लोग बस के बजाय रेल से सफर करने में ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं। लेकिन बीते कुछ महीनों से लगातार रेल दुर्घटनाएं हो रही हैं। रेल के परिचालन में विलंब होना आम बात हो गई है। ट्रेन में सफर के दौरान छेड़खानी, हत्या, लूटपाट जैसे अपराध भी बढ़ते जा रहे हैं। तो सवाल है कि जनता अपनी यात्रा को कैसे सुरक्षित महसूस करे?
रेलमंत्री ने कहा है कि ट्रेनों के प्रत्येक डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे जिससे ट्रेनों में सफर करने वाली सभी महिलाएं व पुरुष अपने आप को सुरक्षित महसूस करेंगे। जुनैद जैसी घटनाएं घटने की आशंका भी कम हो जाएगी। चोरी, लूटपाट, चैन स्नैचिंग जैसे वाकये भी नहीं होंगे। वहीं दूसरी ओर सरकार ने एक बुलेट ट्रेन परियोजना की नींव डाली है। बुलेट ट्रेन 360 किलोमीटर प्रति घंटा की चाल से दौड़ेगी, पर क्या उसमें गरीब लोग यात्रा कर सकेंगे? रही बात पटरी से ट्रेनों के उतर जाने की घटनाओं की, तो उसके लिए रेलमंत्री को ही बदल दिया गया। क्या सरकार यह सोचती होगी कि पुराने रेलमंत्री की जगह नए रेलमंत्री के आ जाने से पटरी से ट्रेन के उतर जाने की घटनाएं नहीं होंगी या बिल्कुल कम हो जाएंगी? पर जनता का यह अनुमान या अनुभव नहीं है। जनता तो बुलेट ट्रेन चाहती ही नहीं है। वह तो सरकार और उनके कुछ वीवीआइपी लोग हैं जो बुलेट ट्रेन चाहते हैं। जनता तो बस यह चाहती है कि ट्रेन हादसे न हों और ट्रेन का परिचालन समय से हो और ट्रेन में सभी को बैठने का स्थान मिले।
’रंजन कुमार, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय

किसकी कमर टूटी
प्रधानमंत्री नरेंद्र्र मोदी ने दावा किया था कि नोटबंदी से नक्सलवादियों, आतंकियों तथा कश्मीर में पत्थरबाजों की कमर टूट गई है। पर मुझे लगता है कि इनकी नीतियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है।
’अभिषेक बर्नवाल, वाराणसी

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