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क्या बदला, माया के दलित

केंद्र में 2014 में बनी नई सरकार ने व्यवस्था बदलने की बात कही थी। देश को साठ साल का गड््ढा दिखाया जो कांग्रेस ने अपनी गलत नीतियों से बनाया था।

Author April 25, 2017 4:18 AM
छात्रों ने पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देने का अनुरोध करते हुए एक किलोमीटर लंबी चिठ्ठी लिखकर पीएम मोदी को भेजी है। (PTI)

क्या बदला

केंद्र में 2014 में बनी नई सरकार ने व्यवस्था बदलने की बात कही थी। देश को साठ साल का गड््ढा दिखाया जो कांग्रेस ने अपनी गलत नीतियों से बनाया था। मीडिया और बौद्धिक वर्ग पर छाई वामपंथियों की बौद्धिक बेईमानी का पदार्फाश किया जिन्होंने हमेशा संघ-भाजपा को एक खल पात्र के रूप में दिखाया। परिवारवाद के जाल में फंस कर अपना प्रभाव खोने वाले समाजवादियों को बेनकाब किया। मुसलिम परस्त हरी धर्मनिरपेक्षता पर देश के रोष को आवाज दी। कुल मिला कर कहें तो अपने से पहले की राजनीति के छेद नई सरकार ने बहुत अच्छे से दिखा दिए। अब जबकि सरकार ने अपना आधे से अधिक समय पूरा कर लिया और अगले साल चुनावी वर्ष में प्रवेश भी कर जाएगी, ऐसे में उसने अपने उठाए कुछ सवालों का कहां तक जवाब दिया है इस पर गौर करना चाहिए।

हमें देखना चाहिए कि क्या सरकार कांग्रेसी शैली से मुक्त हो गई? क्या गड््ढे भरने की ठोस कवायद हुई, अफसरशाही कम हुई, आलाकमान संस्कृति पर लगाम लगी? हमें मूल्यांकन करना चाहिए कि क्या संघ-भाजपा ने कथित तौर पर बनाई गई अपनी बुरी छवि को तोड़ने का काम किया? क्या वह देशभक्ति की शर्त पर देश के सभी वर्गों की रहनुमा बन सकी! क्या उसने परिवारवाद से तौबा की? शीर्ष पर न सही लेकिन नीचे तो अब भाजपा ने भी ऐसे परिवार तैयार कर दिए हैं जिनकी तीसरी पीढ़ी पार्टी के नाम पर मलाई खा रही है। क्या वह हरे रंग की धर्मनिरपेक्षता की जगह ‘विकास सबका, तुष्टिकरण किसी का नहीं’ के कट्टर समतावादी नजरिए से काम कर रही है? हज सब्सिडी को जारी रखते हुए अब तो तीर्थयात्राओं की सरकारी फंडिंग की व्यवस्था कर दी गई है! हमें बेहद चौकस होकर उन सवालों के जवाब पूछने चाहिए जिन्हें सरकारी पार्टी सत्ता से पहले और अब तक उठा रही है।
’अंकित दूबे, जनेवि, नई दिल्ली.

 
माया के दलित
बसपा सुप्रीमो मायावती की दृष्टि में उत्तर प्रदेश में केवल दो ही दलित हैं। एक वे स्वयं और दूसरे, नवनियुक्त पार्टी उपाध्यक्ष उनके भाई, जिनकी आय पिछले सात वर्षों में 18 हजार प्रतिशत बढ़ी और जिनकी आय से अधिक संपत्ति सहित आर्थिक प्रकरणों की जांच चल रही है। इनके परिवार को लाखों के खर्च से चुनाव लड़ कर सांसद/ विधायक बनने की क्या आवश्यकता जब इनकी माया ही पर्याप्त है! प्रदेश के समाजवादियों का समाजवाद भी पूरी तरह मुलायमजी के यादव कुनबे तक सीमित है!
’राधेश्याम ताम्रकर, दमण

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