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चौपाल: भ्रम के गुरु

जो समाज मनोविकार से ग्रस्त महिला का इलाज कराने के बजाय उसे ‘डायन’ समझ कर पत्थर से मार देता है।
Author November 2, 2016 05:31 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

उस सामाजिक स्थिति को क्या का जा सकता है जिसमें कोई यह कहे कि अगर समोसे के साथ हरी चटनी खाओ तो भगवान की कृपा मिल जाएगी। या फिर यह कहा जाए कि आज आपने जलेबी नहीं खाई, इस कारण से भगवान रूठे हुए हैं और उनकी कृपा रुकी हुई है। कपड़े के रंग या फिर चटनी, समोसे या फिर जलेबी में भगवान को ढूंढ़ने की कोशिश करना क्या हास्यास्पद नहीं है? कैसा है वह समाज, जो इस मूढ़ता को अपने साथ चिपकाए हुए है।

जो समाज मनोविकार से ग्रस्त महिला का इलाज कराने के बजाय उसे ‘डायन’ समझ कर पत्थर से मार देता है, उसे कुपोषित ही कहेंगे। सामाजिक कुपोषण को दूर करने के लिए परिवार, स्कूल और मीडिया को एक साथ मिल कर कार्य करना होगा।
’पीके सिंह पाल, रायबरेली रोड, लखनऊ

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