ताज़ा खबर
 

मुफ्ती की चुनौती

पिछले डेढ़ महीने में तकरीबन एक के औसत से रोजाना कश्मीर घाटी में सरकारी स्कूल जलाए जा रहे हैं।

Author Published on: November 10, 2016 4:04 AM
पिछले दिनों घाटी में फैली हिंसा में जलाया गया कश्मीरी स्कूल। (फाइल फोटो)

पिछले डेढ़ महीने में तकरीबन एक के औसत से रोजाना कश्मीर घाटी में सरकारी स्कूल जलाए जा रहे हैं। गौर करने वाली बात है कि किसी मदरसे में आग नहीं लगाई गई। यानी आग लगाने वाले चाहते हैं कि कश्मीरी बच्चे केवल मदरसों में पढ़ें, सरकारी विद्यालयों में नहीं जहां वैज्ञानिक पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दी जाती थी। दो महीने पहले राज्य सरकार ने घाटी के अड़तालीस ऐसे मदरसों की पहचान की थी जहां पढ़ाई के नाम पर देश-विरोधी जहर भरा जाता है, अलगाव और हिंसा को प्रोत्साहित किया जाता है। ये सभी जमात-ए-इस्लामी द्वारा संचालित हैं। इनके विरुद्ध कार्रवाई होनी थी। पर सरकार ऐसा कर पाती, उसके पहले ही सरकारी स्कूलों पर हमले शुरू हो गए।

गौरतलब है कि जमात के चार सौ से अधिक मदरसों पर पाकिस्तान सरकार ने भी कार्रवाई कर उन्हें बंद कराया है। यह क्रम परवेज मुशर्रफ के समय से चला। इन मदरसों से लश्करे-तैयबा आदि आतंकी संगठनों को भरती के लिए लड़के मिलते थे, जिनका पूरा ‘ब्रेनवाश’ हुआ होता था। महबूबा मुफ्ती के सामने चुनौती न सिर्फ अपने विद्यालय सुरक्षित रखने की है, बल्कि अलगाववादी मदरसों को कानून के समक्ष नतमस्तक कराने की भी है।
’अजय मित्तल, मेरठ

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 हॉकी का सम्मान
2 सियासी संवेदना
3 क्या बचेगा