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चौपाल: कामयाबी का फलसफा

इकबाल भारत के मशहूर कवि थे और वे खुद को दार्शनिक और फलसफी भी मानते थे।

Author Published on: October 27, 2016 5:58 AM
बाज।

इकबाल भारत के मशहूर कवि थे और वे खुद को दार्शनिक और फलसफी भी मानते थे। उन्होंने अपने शेर में ईगल यानी बाज के उड़ान की तारीफ करते हुए उसे आदर्श बताया और उस पक्षी से प्रेरणा लेने की बात कही। बहुत से विद्वानों ने उनका फलसफा कबूला, जबकि मजनू गोरखपुरी और कुछ दूसरे लोगों इकबाल के ईगल के फलसफे की आलोचना की। उन्होंने यह तर्क दिया कि ईगल छोटे जंतुओं को मार कर खाता है। उस पक्षी को आदर्श नहीं माना जा सकता। लेकिन वे यह भूल गए कि उसी ईगल में उड़ने और मंजिल तक पहुंचने की असीम शक्ति और बेपनाह हिम्मत होती है। हालांकि आज की तारीख में जिन लोगों ने इकबाल के ईगल के फलसफे को कुबूला, उनमें एक नाम आइएएस टॉपर शाह फैसल का है। नौजवान विद्यार्थियों के लिए आदर्श शाह का कहना है- ‘मैं इकबाल की शायरी को सिर्फ शायरी नहीं मानता। यह जीवन का फलसफा है। मैंने उकाब (बाज या ईगल) की सोच को अपने अंदर लाने की कोशिश की।’

यानी एक ही पक्षी के बारे में दो तथ्य सामने हैं। सवाल है कि इनमें से कौन सही और कौन गलत हंै? मैं केवल यह कहना चाहता हूं कि जिसने बाज की कमियों पर नजर रखते हुए उसकी आलोचना की, वे आलोचक कहलाए और जिसने इकबाल के फलसफे को समझा और बाज के साहस की सराहना करते हुए उस जैसा बनने का प्रयास किया वह शाह फैसल कहलाया और आइएएस में टॉप किया। कामयाबी सीख लेने में है या उसकी आलोचना करने में!
’हसन अकरम, जामिया मिल्लिया, नई दिल्ली

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