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नफरत को हवा

पाकिस्तान में रेलवे स्टेशनों और सड़क किनारे बिकने वाली किताबों या सनसनी फैलाने वाली पत्रिकाओं में छपी कहानियों में खलनायक का किरदार आमतौर पर हिंदू निभाते हैं।
Author October 3, 2017 05:36 am
पाकिस्तान ने माना कि भारत का परमाणु हथियार कार्यक्रम दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला कार्यक्रम है। (संकेतात्मक तस्वीर)

नफरत को हवा
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में नफरत और मोहब्बत साथ चलती हैं। यह विचित्रता दुनिया में कहीं और नहीं पाई जाती। संभवत: इसकी वजह इनका डीएनए है जो सरहद के दोनों ओर के लोगों में समान रूप से पाया जाता है। कुछ अपवादों को छोड़ दिया जाए तो दोनों ओर के कलाकारों को एक-दूसरे के मुल्क में भरपूर सम्मान और स्नेह मिला है। तमाम पूर्वाग्रहों के बावजूद गुलाम अली और नुसरत फतेह अली खान को चाव से इस तरफ सुना जाता है। वहीं लता मंगेशकर और हिंदी फिल्में उस तरफ खूब पसंद की जाती हैं।  राजनीतिक मजबूरियों के चलते रिश्तों में कड़वाहट मुमकिन है लेकिन दोनों ओर ऐसे तत्त्व भी हैं जो इस नफरत को हवा देते रहते हैं। हेडिलबर्ग विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर जुरगेन शफलकमर ने पाकिस्तान में रह कर एक दिलचस्प शोध किया है। ‘द कनवर्सेशन’ वेबसाइट पर जारी उनका शोध सिद्ध करता है कि दोनों तरफ की सरकारें कड़वाहट कम करने के कितने ही जतन कर लें पर कभी सफल नहीं होंगी। उनका यह शोध गैर साहित्यिक उपन्यासों पर आधारित है। पाकिस्तान में रेलवे स्टेशनों और सड़क किनारे बिकने वाली किताबों या सनसनी फैलाने वाली पत्रिकाओं में छपी कहानियों में खलनायक का किरदार आमतौर पर हिंदू निभाते हैं।

तीस से पचास हजार की संख्या में छपने वाली ये किताबें वहां के सभी प्रमुख शहरों में पढ़ी जाती हैं। हॉरर और जासूसी कहानियों से भरी इन किताबों में बुरे काम करने वाले सभी पात्र भारतीय या हिंदू होते हैं। मोहन, शंकर, निशा, महेंद्र आदि नाम के पात्र मुसलमानों को परेशान करते हैं या जिन्न, भूत, चुड़ैल बन कर लोगों को तंग करते हैं। इन लोगों को मारने वाला इस्लाम का नेक फरिश्ता होता है जो अमन और मोहब्बत का पैगाम सारी दुनिया में फैलाता है!
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में इतने बड़े उतार-चढ़ाव आ चुके हैं कि इस ‘लुगदी साहित्य’ पर चर्चा की गुंजाइश शायद ही कभी आए। नफरत और चरित्र हत्या का सिलसिला यों ही चलता रहेगा। जावेद अख्तर, जगजीत सिंह और गुलजार को सुनने वाले लोग भारतीयों से बिला वजह नफरत करते रहेंगे! हिंदुस्तानी कभी नहीं जान पाएंगे कि आखिर आम पाकिस्तानी उनसे इतनी दुश्मनी क्यों रखता है? पाकिस्तान की वरिष्ठ स्तंभकार जाहिदा हिना इस तरह गलतफहमियां बढ़ाने वाले मसलों पर अक्सर अपनी कलम चलाती रहती हैं। भारत में उनके कॉलम को पसंद करने वालों की तादाद लाखों में है।
’रजनीश जैन, शुजालपुर, मध्यप्रदेश

हाशिये के लोग
एक दिन वंशवाद और परिवारवाद पर कॉलेज के स्टाफ रूम में चर्चा हो रही थी। प्राचार्यजी इस चर्चा में शामिल हुए। कहने लगे कि कौन ऐसा अभिभावक है जो संतान का करियर बनाने लिए अपने रसूख, धनबल आदि का इस्तेमाल नहीं करता! हर कोई करता है। फिल्म संसार, राजनीति, उद्योग जगत आदि से जुडा हर भद्र पुरुष खास तौर पर करता है। कोई भी अभिभावक अपनी संतान को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं बनाएगा। कम से कम अपने बराबर तो बनाएगा ही! राजनीति में अभी तक यह परिपाटी कांग्रेस में मिलती थी और नतीजतन, उसने बदनामी अर्जित की। अब दूसरी राजनीतिक पार्टियों को भी यह ‘इन्फेक्शन’ लग गया है।
इस सारी प्रक्रिया में अगर कोई घाटे में रहता है तो वह है आम आदमी, जिसके अभिभावक न तो उद्योगपति हैं और न फिल्मी या राजनीतिक हस्तियां। हमारे समाज में साधनहीन हमेशा हाशिये पर धकेले जाते रहे हैं और रसूखदारों के हर काम सधते रहे हैं।
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

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