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सेहत के सामने

तेजी से बदल रही जीवनशैली, खानपान और शारीरिक कसरत की कमी के कारण आज वृद्ध ही नहीं, युवा पीढ़ी भी मोटापा, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों की गिरफ्त में आ रही है।
Author November 23, 2017 05:12 am
प्रतीकात्मक फोटो। (Source: Dreamstime)

हाल ही में ‘इंडिया हेल्थ आॅफ द नेशन्स स्टेट्स’ नाम से जारी की रिपोर्ट में चौंकाने वाले स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में 1990 की तुलना में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां यानी गैरसंक्रामक रोग से जुड़े मामलों की संख्या 2016 तक करीब दोगुनी हो गई। इस रिपोर्ट को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने तैयार किया है। तेजी से बदल रही जीवनशैली, खानपान और शारीरिक कसरत की कमी के कारण आज वृद्ध ही नहीं, युवा पीढ़ी भी मोटापा, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों की गिरफ्त में आ रही है। देश की आबादी का इक्कीस फीसद हिस्सा हृदय रोगों, अत्यधिक तनाव और उच्च रक्तचाप की चपेट में है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि चालीस साल से कम उम्र के लोगों में हृदय रोग और मधुमेह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार अठारह वर्ष से कम आयु के लगभग बाईस फीसद बच्चे मोटापे की गिरफ्त में हैं। वहीं हर पांच में से एक महिला भी मोटापे की शिकार है। मोटापे की वजह से बड़ों में ही नहीं, बच्चों में भी मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय से जुड़ी बीमारियां तेजी से पांव पसार रही है। वही युवाओं में सिगरेट और तंबाकू की लत से सांस की तकलीफ और कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। शराब का सेवन किडनी और पेट की समस्याओं के साथ मोटापा बढ़ने का कारण बन रहा है, जिससे कई तरह की बीमारियां पैदा हो जाती हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान इतना व्यस्त हो चला है कि वह अपने शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए एक दिन में तीस-चालीस मिनट भी निकाल नहीं पा रहा है। यह बात सही है कि आॅनलाइन शॉपिंग या भुगतान जैसी आधुनिक और उन्नत तकनीक ने हमारे लिए जीवन को आसान बनाया है लेकिन इनका दुष्प्रभाव यह हुआ है कि हमारे स्वास्थ्य का सवाल हाशिये पर चला गया है। महानगरीय जीवनशैली वाले युवा अब शारीरिक रूप से कम सक्रिय हैं। कंप्यूटर पर काम करते हुए लंबे समय तक एक डेस्क पर बैठे रहते हैं, स्मार्टफोन पर सोशल मीडिया का उपयोग कर टीवी देखते हैं। इन सभी गतिविधियों के कारण किशोरों और युवाओं में शारीरिक गतिविधि का स्तर कम हो गया है।

चार मुख्य जोखिम कारकों, जैसे तंबाकू सेवन, अस्वस्थ आहार, शारीरिक गतिविधि न करना और शराब के सेवन को नियंत्रित कर लिया जाए तो मधुमेह और हृदय रोग से होने वाली अस्सी प्रतिशत समय पूर्व मौतों से बचा जा सकता है। इसके अलावा अगर हम अपनी खराब जीवन शैली को बदल दें, तो बीमारियां नहीं होंगीं। स्वस्थ जीवन शैली (समय पर सोना-जागना, समय पर भोजन, उपयुक्त व्यायाम, तनाव से बचाव) में ही अच्छा स्वास्थ्य है। जरूरी है कि अभिभावक भी जीवनशैली में बदलाव लाएं और बच्चों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करें। अपनी दिनचर्या में प्रकृति के साथ समय बिताना शामिल करें। इसके अलावा गैर-संक्रामक बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केंद्र सरकार को सस्ती और समय पर मिलने वाली स्वास्थ्य सेवा को हर नागरिक का मूल अधिकार बनाना चाहिए ।
’कैलाश बिश्नोई, मुखर्जीनगर, दिल्ली

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