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चौपाल- बेरोजगारी का विकास

सरकार द्वारा की जाने वाली भर्तियों में पदों की संख्या बेरोजगारों की भीड़ को देखते हुए ऊंट के मुंह में जीरे के समान होती है।

Author January 1, 2018 5:57 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

बेरोजगारी का विकास

सरकारी क्षेत्र में रोजगार हासिल करने के लिए बेरोजगार युवाओं को आज कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। लाखों बेरोजगार युवाओं को आवेदन करने के एवज में आवश्यकता से अधिक आवेदन राशि देनी पड़ रही है। आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए इस बेरोजगार युग में रुपए जुटाना कोई आसान काम नहीं है। सरकार द्वारा की जाने वाली भर्तियों में पदों की संख्या बेरोजगारों की भीड़ को देखते हुए ऊंट के मुंह में जीरे के समान होती है। इसके बावजूद लाखों युवाओं द्वारा दिया गया आवेदन शुल्क सरकार के खजाने में जमा हो जाता है।
देश में बेरोजगारी की दर कम किए बिना विकास का दावा करना कभी भी न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। देश का शिक्षित बेरोजगार युवा आज स्थायी रोजगार की तलाश में है। ऐसे में बमुश्किल किसी निजी संस्थान में अस्थायी नौकरी मिलना भविष्य में नौकरी की सुरक्षा के लिए लिहाज से एक बड़ा खतरा है। सरकार द्वारा सरकारी महकमों को पीपीपी स्वरूप में तब्दील कर देने और खुद अपनी जिम्मेदारी निभाने से पीछे हटने को लेकर शक बढ़ता है कि सरकार क्या करने वाली है।
यह सब मिल कर सेवा क्षेत्र में बढ़ती जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना को दर्शाता है। सरकार को देश के सेवा क्षेत्र में नए प्रयोग करने के साथ-साथ उसमें विस्तार करने की जरूरत है, ताकि नए पद सृजित किए जा सकें। नए सरकारी पद सृजित होंगे तो युवाओं को रोजगार मिलेगा। इससे देश की विकास दर रफ्तार पकड़ेगी। आज कृषि, प्रशासन, बैंक, बीमा, चिकित्सा, शिक्षा, रक्षा, साइबर सुरक्षा, तकनीकी और अनुसंधान क्षेत्रों में नए पदों पर भर्तियों की आवश्यकता है।
’रक्षित परमार, उदयपुर, राजस्थान

लापरवाही का रोग
यह खबर हैरान करने वाली है कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव में, बिना बिजली और बिस्तर के, मोतियाबिंद के आॅपरेशन टॉर्च की रोशनी में किए गए। एक एनजीओ ने अंधता निवारण समिति के माध्यम से मोतियाबिंद के लिए शिविर लगाया था। शिविरों में जो मोतियाबिंद के आॅपरेशन किए जाते हैं, उनकी काफी शिकायतें आती रहती हैं। यह आज ही नहीं, बल्कि बहुत पहले के मामलों से भी पता चलता है। रोगियों को संक्रमण होने, आंखों की रोशनी कम होने या खत्म हो जाने जैसी परेशानियां झेलनी पड़ी हैं। मोतियाबिंद के आॅपरेशन के लिए शिविर का आयोजन तो किया जाता है, लेकिन जहां मरीजों का आॅपरेशन होने वाला होता है, वहां की सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। उस पर ध्यान देने की जिम्मेदारी शिविर का आयोजन करने वालों के साथ-साथ आॅपरेशन करने वाले डॉक्टरों और अस्पताल की होती है। मरीजों की सेवा करने के बजाय उन्हें और तकलीफ में डाल देने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। आंखों के परीक्षण के शिविर बहुत जगह लगाए जाते हैं, लेकिन जो शिविर आंखों से संबंधित कोई भी आॅपरेशन के लिए लगाया जाता है, उनके लिए सरकारी अनुमति अनिवार्य बना देनी चाहिए और उनकी गतिविधियों की समुचित निगरानी की जानी चाहिए।
’वैजयंती सूर्यवंशी, पालघर, महाराष्ट्र

सड़क के नियम
नए साल की शुरुआत यानी एक जनवरी से मोटर वाहन अधिनियम की नई जुर्माना व्यवस्था लागू हो रही है, जिसमें यातायात नियमों के उल्लंघन पर पहले की तुलना में दस गुना अधिक जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। किसी नाबालिग के वाहन चलाते पाए जाने पर अभिभावक और वाहन मालिक जिम्मेदार माने जाएंगे। हमारे शहर में भी सैकड़ों स्कूली बच्चे धड़ल्ले से तेज रफ्तार में आधुनिक तकनीकी से लैस वाहन भी चलाते देखे जाते हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावकों को नए नियमों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कथित प्रतिष्ठा और सुविधा के नाम पर अपने मासूम बच्चों और निर्दोष राहगीरों के जीवन को खतरे में डालना एक भयावह स्थिति है। शिक्षण संस्थाओं में भी जागरूकता फैलाने के लिए विशेष रूप से इस विषय पर अभिभावक-विद्यार्थी परिचर्चा आयोजित की जानी चाहिए।
’ऋषभ देव पांडेय, जशपुर, छत्तीसगढ़

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