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चौपाल- चिंता का विषय, हत्यारा कौन

पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के प्रथम 500 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय न होने पर चिंता जताई।

Author October 17, 2017 5:34 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स विकिपीडिया)

चिंता का विषय
पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के प्रथम 500 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय न होने पर चिंता जताई। यह सिर्फ प्रधानमंत्री के लिए नहीं, हम सबके लिए भी चिंता का विषय है कि कभी आर्यभट्ट, चरक, रामानुजम और रमन जैसी महान हस्तियों की भूमि रहा भारत आज उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इतना पीछे है।
दरअसल, हमारे देश में उच्च शिक्षा संस्थानों की कमी नहीं है, बल्कि उनमें गुणवत्ता का अभाव है। प्राध्यापकों के साथ-साथ पुस्तकों और अन्य सुविधाओं की कमी है। अनेक संस्थानों में संकाय प्राध्यापकों के लगभग आधे पद खाली हैं। उच्च शिक्षा संस्थानों में से अधिकतर के पाठ्यक्रम या तो बहुत पुराने हैं या विद्यार्थियों के लिए सृजनात्मक नहीं हैं। योजना आयोग (अब नीति आयोग) की एक रिपोर्ट के मुताबिक तो हमारे कुल स्नातकों में से केवल पांच प्रतिशत को रोजगार मिल पाता है।
ऐसे में जरूरी है कि हम अपने विवेक की रिक्तता को पहचानें और सोचें कि आखिर शिक्षा के क्षेत्र में विश्व-शक्ति बनने से हम कहां चूक रहे हैं? कभी तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे संस्थानों के जरिए दुनिया भर के छात्रों को रोशनी प्रदान करने वाला भारत आखिर कब तक अपने विद्यार्थियों को अंधेरे में रखेगा?
’राहुल रंजन, दिल्ली

हत्यारा कौन
जो सवाल 16 मई 2008 को आरुषि की हत्या के बाद उठा था वह नौ साल बाद फिर से जिंदा हो गया कि ‘आरुषि को किसने मारा?’ गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने 26 नवंबर 2013 को जिन साक्ष्यों के आधार पर उम्रकैद की सजा सुनाई थी उन्हीं तथ्यों और साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं मानते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपती को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। इस पूरे प्रकरण ने पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्य प्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। आरुषि और घरेलू नौकर हेमराज की हत्या एक ही दिन दिन की गई थी लेकिन जिस नौकर पर हत्या का आरोप लगा था उसकी लाश अगले दिन आरुषि के घर की छत से मिली। सवाल है कि पुलिस ने उसी रोज छत पर छानबीन क्यों नहीं की?
दूसरा बड़ा सवाल सीबीआई पर उठता है। गौरतलब है कि तत्कालीन सीबीआई निदेशक एपी सिंह ने जो ‘क्लोजर रिपोर्ट’ अदालत में दाखिल की थी तो उसमें उन्होंने तलवार दंपती के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होने की बात कही थी लेकिन अदालत ने उसी क्लोजर रिपोर्ट को आरोप पत्र में बदल दिया। इस पूरे मामले में कानून और न्याय व्यवस्था की खामियांभी बड़े पैमाने पर सामने आई हैं।
’धर्मेंद्र सिंह, नई दिल्ली

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