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डिजिटल भुगतान

डिजिटल साक्षरता ग्रामीणों में कम है, इसलिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता के कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिए।

Author Published on: January 16, 2017 2:21 AM
मोबाइल भुगतान व कॉमर्स फर्म पेटीएम। (फाइल फोटो)

विमुद्रीकरण का एक बड़ा लक्ष्य कालेधन की समाप्ति था, लेकिन इस कैंसर-से फैले रोग पर की गई कीमोथेरेपी ने कोई बहुत ज्यादा असर नहीं दिखाया, बल्कि इस थेरेपी से शरीर अर्थात देश को काफी नुकसान उठाना पड़ा। दरअसल, हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्र में कैशलेस की एक पुरानी परंपरा है कि हम दुकानदार को फसल बेच कर इकट्ठा ही भुगतान करते हैं। यहां वस्तु-विनिमय भी प्रचलन में था। आज मोबाइल तक अधिकतर लोगों की पहुंच है। अब डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए ‘डिजिटल साक्षरता’ अत्यंत आवश्यक है। सरकार द्वारा जारी ‘यूपीआई’ का उन्नत संस्करण ‘भीम एप’ भुगतान का भरोसेमंद माध्यम है। डिजिटल साक्षरता ग्रामीणों में कम है, इसलिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता के कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिए। लोगों को भरोसा दिलाया जाए कि उनका धन बैंक में पूरी तरह सुरक्षित है। इससे भारत की ‘बचत की संस्कृति’ को बढ़ावा मिलेगा, जिसने 2008 की वैश्विक मंदी के बावजूद भारत को बचाए रखा।

डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन के रूप में ‘लकी ग्राहक योजना’ को विस्तार दिया जा सकता है। अति पिछड़े क्षेत्रों की बैंकों तक पहुंच में विस्तार किया जाए। वंचित क्षेत्रों में मोबाइल संचार के लिए कनेक्टिविटी का दायरा भी बढ़े। एक महत्त्वपूर्ण तथ्य यह कि डिजिटल पेमेंट पर लगने वाले शुल्क को न्यून किया जाए, और प्रतिदिन भुगतान की सीमा बढ़ाई जाए। साथ ही साइबर सुरक्षा से जुड़े ढांचों और पुराने कानून को संशोधित कर तेज धार दी जानी चाहिए। डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया अत्यंत आसान होने के कारण लोग इसे अवश्य अपनाएंगे।
’प्रकाश सुथार, गांव-संघर, श्रीगंगानगर

PayTM के साथ 48 ग्राहकों ने की धोखाधड़ी, 6 लाख रुपए का लगाया चूना; CBI ने दर्ज किया केस

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