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चौपाल- कचरा प्रबंधन

कचरा प्रबंधन में कचरे की कुशल छंटाई प्रमुख समस्या है। दिन-प्रतिदिन शहरीकरण बढ़ रहा है।

Author October 23, 2017 05:45 am
दिल्‍ली में इन दिनों जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा हुआ है। (फाइल फोटो)

कचरा प्रबंधन
कचरा प्रबंधन में कचरे की कुशल छंटाई प्रमुख समस्या है। दिन-प्रतिदिन शहरीकरण बढ़ रहा है। ऐसे में पारिस्थितिक रूप से स्थायी विकास के लिए घरों से पैदा होने वाले ठोस कचरे का प्रदूषण-मुक्त निपटारा जरूरी है। मिट्टी, हवा और पानी को कचरे के संक्रमण से बचा कर ही प्राकृतिक वातावरण की रक्षा की जा सकती है।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता बनाए रखने के लिए कूड़ा सही जगह फेंकना/डालना तो हमने शुरू कर दिया, पर मानव सभ्यता के विकास के इस दौर में और भी बहुत कुछ करना बाकी है। हमें कचरा उत्पादन में कमी लानी होगी। उसका सही निपटारा करने के लिए प्लास्टिक, कांच, धातु कचरा, लकड़ियां, पशुओं के लिए खाने योग्य ठोस आदि सभी को एक साथ मिला कर कचरा बनाने से पहले ही निपटारा करना सीखना होगा।
इन सबको एक साथ मिलाकर कर इकट्ठा करना और फिर पूरे कचरे को किसी जगह डाल देना समाधान नहीं है। ऐसे में शहरीकरण के साथ-साथ डंपिंग यार्ड भी बनते जाएंगे, जो कि प्राकृतिक वातावरण को नुकसान पहुंचाएंगे। डंपिंग यार्ड में आग लगना किसी विनाश से कम नहीं है। इस समस्या से निपटने के लिए पाठ्यक्रम में स्मार्ट कचरा प्रबंधन शामिल करना चाहिए। अखबार, रेडियो, टेलीविजन व इंटरनेट के जरिए आमजन को जागरूक करना चाहिए।
’राज सिंह रेपसवाल, सिद्धार्थ नगर, जयपुर
युवाओं के हाथ
जोसेफ मेजिनी ने कहा था ‘यदि समाज में क्रांति लानी हो तो क्रांति का नेतृत्व युवाओं के हाथ में दे दो।’ इतिहास के पन्नों में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जाएंगे कि जब-जब युवा जोश का तूफान उठा है, दुनिया में क्रांतियां आई हैं, व्यवस्थाओं में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। नेपोलियन, सिकंदर और चंद्रगुप्त मौर्य जैसे युवा योद्धाओं से इतिहास पटा पड़ा है। उस दौर में भी युवा संघर्षरत थे, आज भी हैं, पर उनके संघर्ष के स्वरूप में परिवर्तन हुआ है। आज विश्वविद्यालयों की छात्र राजनीति में छात्रहितों की बात करना बेमानी हो गया है। देश के सभी राजनीतिक दलों की ‘डर्टी पालिटिक्स’ यहां भी अपनी गहरी पैठ बना चुकी है।
’मनु यादव, इलाहाबाद विश्वविद्यालय

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