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आजकल समाज में महंगी शादियों का फैशन-सा चल पड़ा है।
Author December 15, 2016 00:15 am
(Representative Image)

आजकल समाज में महंगी शादियों का फैशन-सा चल पड़ा है। इन भड़कीली और तड़क-भड़क वाली शादियों में जहां एक ओर बड़ी मात्रा में अन्न का दुरुपयोग हो रहा है तो दूसरी ओर धन की बर्बादी के साथ बिजली भी अंधाधुंध तरीके से फूंका जा रहा है। शादियों से पहले महंगे-महंगे आमंत्रण पत्र और कीमती उपहार देकर संगे-संबंधियों और मेहमानों को बुलाया जाने लगा है और आयोजन के लिए नामी पांच सितारा होटल बुक किए जाने लगे हैं, जिसमें करोड़ों रुपए खर्च कर शादी का सेट खड़ा किया जा रहा है। कुछ घंटे मेहमानोें के बैठने के लिए सुंदर और खूबसूरत सोफा लगाया जाता है। वहीं शादी के बाद खाने के रूप में अनगिनत भोज्य पदार्थों और तरह-तरह की मिठाइयों से सजी थैलियां परोस कर मेहमानों को मोहित करने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा, खाने के बाद नाचने के लिए सुप्रसिद्घ डीजे और साउंड सिस्टम पर अश्लील और अमर्यादित संगीत बजा कर मेहमानों को नचाया जाने लगा है।

इस तरह उच्च वर्ग द्वारा शाही अंदाज में आयोजित की जा रही शादियों को देख कर मध्यम और निम्न वर्ग भी शादियों में पैसे को पानी की तरह बहाने से नहीं हिचकिचा रहा है। लोग शादी में अपना स्तर, रुतबा और झूठी शानो-शौकत का प्रदर्शन करने के लिए कर्ज लेकर भी महंगी शादियां आयोजित कर रहे हैं। कन्यादान, दहेज सहित दूसरे बेलगाम खर्चों की तो बात ही छोड़ दें। हमारे देश के नेताओं के कई उदाहरण ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी संतानों की शादियों में रिकार्ड तोड़ पैसा बहाने में कोई कसर नहीं रखी है। जहां देश में एक ओर भयंकर भुखमरी के कारण लाखों बेसहारा और गरीब लोग एक वक्त के खाने को तरस रहे हों, वहां शादियों में अन्न की बड़े पैमाने पर बर्बादी करना कौन-सी बुद्धिमत्ता है?
जहां देश में लोग कुछ हालात में चोरी, लूट-खसोट करने को मजबूर हो रहे हैं, वहां अरबों का खर्च क्या वाजिब है? विवाह का आयोजन आज शोरगुल और हो-हल्ले में तब्दील होता जा रहा है। जरूरी है कि हम चकाचौंध के चक्रव्यूह से बाहर निकल कर शादियों में मितव्ययिता का उदाहरण पेश करें।
’देवेंद्रराज सुथार, जालोर, राजस्थान

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